जब बन्द-ए-मोमिन दिन भर में पांच वक़्त की नमाज़ अदा करता है तो जानिए कितना सवाब मिलता है

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Namaz ka falsafa
namaz in makkah
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Namaz ka falsafa

नमाज़ का फ़लसफ़ा:

शबे मेअराज में हुज़ूरे अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को पचास (50) वक़्त की नमाज़ का तोहफ़ा अता हुआ था।

लेकिन जब मूसा अलैहिस्सलाम के कहने पर आपकी उम्मत 50 वक़्त की नमाज़ किस तरह अदा करेगी।

तब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने तक़रीबन नौ बार वापस जा कर नमाज़ कम कराई

और फिर अल्लाह तआला ने पांच वक़्त की नमाज़ अता की।

और जब बन्द-ए-मोमिन दिन भर में पांच वक़्त की नमाज़ अदा करता है

तो पांच पर और एक सिफर बढ़ा कर पचास (50) का सवाब बख़्शता है।

(तारीख़े आलम न० 288)

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