जानिए जनाज़े के साथ जाने का कितना सवाब मिलता है

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Janaze ke sath jane ka hukm
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Janaze ke sath jane ka hukm

जनाज़े (janazah) के साथ जाने का हुक्म

हज़रत उन्स(रज़ि०) से रिवायत है कि-

रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि

जो शख़्स जनाज़े पर आया यहाँ तक कि उस पर नमाज़ पढ़ी तो एक क़ीरात भर सवाब मिलेगा

और जो उसके दफ़न होने तक मौजूद रहा तो उसको दो क़ीरात के बराबर सवाब मिलेगा।

(बुख़ारी व मुस्लिम)

फ़ायदा

इस हदीस शरीफ़ का मतलब यह है कि जो शख़्स किसी जनाज़े पर आया और नमाज़ पढ़ने तक शरीक रहा, फिर चला आया तो उसको दो पहाड़ों के वज़न के बराबर सवाब मिलेगा और अगर मैय्यत को दफ़न करके आया तो उसको चार पहाड़ों के बराबर सवाब मिलेगा।

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हज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दरियाफ़्त किया गया कि-
या रसूल अल्लाह! कीरात कितना होता है?आपने फ़रमाया, दो बड़े पहाड़ों के बराबर।

फ़ायदा- देखो भाइयो! जनाज़े की शिरकत का कितना बड़ा सवाब है। मगर शरीक होकर हुक़्क़ा ही सिर्फ़ न पियें बल्कि ज़रूरत हो तो मैय्यत के ग़ुस्ल और कफ़न और दूसरे कामों का इन्तज़ाम करा देना चाहिए कि शिरकत करने से मैय्यत की और मैय्यत वालों की मदद और ख़िदमत भी हो जायेगी और सवाब-ए-अज़ीम भी पाओगे।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़,सफ़ा न० 304)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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