पढ़िए जुमे की नमाज़ न पढ़ने की सज़ा क्या है

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Punishment of abandoning namaz of Jum'ah
Namaz
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Punishment of abandoning namaz of Jum’ah

Punishment of abandoning namaz of Jum’ah : The Messenger of Allah (Peace Be upon Him) said,

People will get stuck by leaving Jum’ah prayer. ==== Allah Ta’ala will stamp their hearts. Then they will fall into a big mistake, and it will be decided to seal that there will be no place for dowry except when the mischief increases. And those who do not pray Jum’ah prayers, I want to set fire to their houses.

(Muslim Sharif)

Benefits –

Allah’s refuge! Those people who live in the city and do not pray for Jum’ah prayer, they have a duty on them. The Messenger of Allah (Peace Be upon Him) are so angry with them!

Issue –

Jum’ah prayers for women are not permissible. They should read zohar prayers in their homes as always.

(Baghe-Jannat Yaani Khudayi Bagh, Safa no. 243)

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जुमे की नमाज़ न पढ़ने की सज़ा

रसूल अल्लाह(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि-
लोग जुमे की नमाज़ छोड़ने से बाज़ आ जायें ====अल्लाहतआला उनके दिलों पर मोहर कर देगा। फिर वह बड़ी ग़फ़लत में पड़ जायेंगे और मोहर करने का अन्जाम यह होगा कि जब ग़फ़लत बढ़ जायेगी तो सिवाय दोज़ख़ के कोई ठिकाना न होगा। और जो लोग जुमे की नमाज़ नहीं पढ़ते मैं चाहता हूँ कि उनके घरों को आग लगा दूँ।(मुस्लिम शरीफ़)
फ़ायदा- अल्लाह की पनाह! जो लोग शहर में रहकर जुमे की नमाज़ नहीं पढ़ने कि उन पर फ़र्ज़ है। हुज़ूर(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उनसे किस क़दर नाराज़ होते हैं!
मसला- औरतों पर जुमे की नमाज़ फर्ज़ नहीं।उनको हमेशा की तरह अपने घरों में ही ज़ोहर की नमाज़ पढ़नी चाहिए और ऐमदों ====-

गर करोगे तुम अदा ऐ दोस्त जुमे की नमाज़,
सात दिन का बख्श देगा सब गुनाह वह बेनियाज़।

एक हफ़्ते के गुनाह जीतने हैं बख्शे जायेंगे,
एक नेकी के एवज़ सत्तर का बदला पायेंगे।

की नमाज़ जुमा जिसने मोमिनों क़स्दन क़ज़ा,
बस जहन्नुम में ठिकाना उसका लाज़िम हो गया।

हैं मौहम्म्द उससे राज़ी और न ख़ुश उससे ख़ुदा,
बल्कि नाराज़ उससे हो जाते हैं सारे अम्बिया।

कर अमल तुझसे जहाँ तक हो सके हैं कर अमल,
ताकि क़ब्र व हश्र का होवे दूर तुझसे ख़लल।

जुज़ अमल कोई भी तेरे काम आयेगा नहीं,
बाद मरने के क़ब्र पर कोई जायेगा नहीं।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़,सफ़ा न० 243)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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