जानिए जमाही के आदाब क्या है

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what is the adaab of yawning in islam
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What is the adaab of yawning in islam

What is the adaab of yawning in islam : The Yawning are from the devil’s side. Hazrat Abu Huraira RAZI Allah is pleased with the fact that the Huzur Pak (Sallallahu Alaihi Wasallam) has been annihilated; Allah loves all sorts of sneezing and the crowd dislikes. The devil is happy with the crowd. While opening the mouth in the Yawning, the devil enters it. Therefore, the Yawning should stop. When the Yawn comes, then when the lower lip is pressed from the upper teeth or if it is placed on the face of the hand, if the person comes in the prayer, then the palm of the hand is placed on the mouth, the rest of the Arakan keeps the sacred hand, the way to stop the gathering is that if If the crowd comes, then take care of yourself in the heart that Ambiya Kiram has never met. The Yawn are from the side of the devil and Ambiya Kiram is conscious of the devil.

(Tarikhe Alam, Safa No. 393)

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Hindi Translation

जमाही के आदाब

जमाही शैतान की तरफ से है। हज़रत अबू हुरैरह रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूर पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशादे गिरामी है अल्लाह तआला को छींक पसन्द है और जमाही नापसन्द। जमाही से शैतान ख़ुश होता है। जमाही में मुंह खोलते वक़्त शैतान उसमें दाखिल होता है। इसलिए जमाही को रोकना चाहिए। जब जमाही आए तो ऊपर के दांतों से निचले होंठ को दबाए या उलटे हाथ कि पुश्त मुंह पर रखे अगर क़्यामे नमाज़ में जमाही आए तो सीधे हाथ की पुश्त मुंह पर रखे बाकी अरकान में उलटे हाथ की पुश्त रखे जमाही रोकने का तरीक़ा यह है कि अगर जमाही आए तो दिल में ख़्याल करे कि अंबियाए किराम को कभी जमाही नहीं आई। जमाही शैतान कि तरफ से होती है और अंबियाए किराम शैतान के शर से महफूज़ रहते हैं।

(तारीख़े आलम, सफ़ा न० 393)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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