जानिए वज़ू करने का कितना सवाब है

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WUZU K FAZAIL OR BARAKAT
Wuzu
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Sawab of wuzu

Sawab of wasu : The Messenger of Allah (Sallallahu Alaihi Wasallam) said,

The person who wins well, his sins are forgiven. I.e., Gunayeh Sajira, Sahaba Arz, or Rasool Allah!

How will you recognize those Muslims who will be after you daily on the Day of Judgment?

You have said that you should tell that if a person’s horse is white and white, and the head is on the forehead and if he is found in siyah horses then will that person recognize his horses?

Sahaba Arz, or Rasul Allah! Surely you will recognize the horses. You said, just like this, I will also recognize the Muslims of my Ummah that their forehead and hands and feet will be illuminated with white and noor, and their blessings will be in their right hands. And the Jannat’s Quji is Namaz and the Quzi of Namaz is Vazoo

(Mishkat).

Benefits

Subhan Allah! Wooing is also the thing of Allah taala mercy and repentance.

Therefore, every Namazee should have done well.

No place will be dry, nor will it be repaired, and when Vaju is not safe, then even the prayer will not be in vain.

 (Baghe Jannat yani Khudai Bagh, Safa no 232)

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Hindi Translation

जानिए वज़ू करने का कितना सवाब है

रसूल अल्लाह(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि-

जो शख़्स अच्छी तरह वज़ू करे उसके गुनाह माफ़ हो जाते है।

यानी गुनाहे सग़ीरा, सहाबा ने अर्ज़ की, या रसूल अल्लाह! आप क़यामत के रोज़ उन मुसलमानों को किस तरह पहचानेंगे जो आपके बाद होंगे।

आपने फ़रमाया तुम यह बतलाओ कि अगर किसी शख़्स के घोड़े सफ़ेद पाँव और सफेद माथे के हो और वह सियाह घोड़ो में मिले हुए हों तो क्या वह शख़्स अपने घोड़ों को पहचान लेगा।

सहाबा ने अर्ज़ की, या रसूल अल्लाह! वह ज़रूर आपने घोड़ों को पहचान लेगा।

आपने फ़रमाया, बस इसी तरह मैं भी अपनी उम्मत के मुसलमानों को पहचान लूँगा कि वज़ू की बरकत से उनके माथे

और हाथ-पाँव सफ़ेद और नूर से रोशन होंगे और उनके आमालनामे उनके दाहिने हाथों में होंगे।

और जन्नत की कुज्जी नमाज़ है और नमाज़ की कुज्जी वज़ू है।

(मिशकात)

फ़ायदा-

सुबहान अल्लाह! वज़ू करना भी अल्लाहतआला की रहमत और मग़फ़िरत की चीज़ है।

इसलिए हर नमाज़ी को चाहिए कि वज़ू ख़ूब अच्छी तरह किया करे।

कोई जगह सूखी न रह जाये वर्ना वज़ू दरुस्त न होगा और जब वज़ू दरुस्त न होगा तो नमाज़ भी दरुस्त न होगी।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़, सफ़ा न० 232)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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