सहाबा रज़ि. ने किस तरह दीन सीखा पढ़ें और शेयर करें

0
68
How did Sahaba Razi learn Deen?
Madina
Islamic Palace App

Click here to Install Islamic Palace Android App Now

How did Sahaba Razi learn Deen?

How did Sahaba Razi learn Deen? : For this reason, whenever Allah sent a sky book in the world,

he sent a Rasool with him, or if Allah wanted all the people, he would have given them Najil Firma, but instead of nullifying a fair book,

always through a Messenger and Prophet The book was sent, so that the Messenger and the Prophet told the people how to implement that book,

and learn from the companionship of that messenger and the purpose of his life.

That is how it is implemented on that book.

Hazrat seba razi Ask them which university did they get training in?

From which madrasa they were studying Hazrat Hazrat? Which book did he read?

The right thing is that there was neither a madarasa nor a course for them,

nor was the course for them, nor was there any training, nor any books,

because the companion took the responsibility of the Prophet (Sallallahu alaihi wasallam). In the outcome of Sohbat,

Huzoor saw a payment of’ (sallallahu alaihi wasallam), and then to adopt that payment in his life and thus became a Sahabi.

(Deen Sikhne Or Sikhane Ka treeka: Safa No. 8)

Follow Us

Click here to like our Facebook page …

Thank you very much for all of you to like ISLAMIC PALACE. If you do not like it, then, to get rid of all the important issues related to this kind of oppression and Islam, definitely, please attach to this page the Islamic Palace, and send as many people as possible through share. thank you


Hindi Translation

सहाबा रज़ि. ने किस तरह दीन सीखा?

इसी वजह से अल्लाह तआला ने जब कभी कोई आसमानी किताब दुनिया में भेजी तो उसके साथ एक रसूल जरूर भेजा,

वर्ना अगर अल्लाह तआला चाहते तो बराहे रास्त कितबा नाज़िल फ़रमा देते,

लेकिन बराहे रास्त किताब नाज़िल करने के बजाये हमेशा किसी रसूल और पैगम्बर के ज़रिये किताब भेजी,

ताकि वह रसूल और पैगम्बर उस किताब पर अमल करने का तरीक़ा लोगों को बताये

और उस रसूल की सोहबत और उसकी जिन्दगी के तर्ज़े अमल से लोग यह सीखें कि उस किताब पर किस तरह अमल किया जाता है।

हज़राते सहाबा रज़ि. से पूछिये कि उन्होंने किस यूनीवर्सिटी में तालीम पाई?

वे हज़रात कौन से मदरसे से पढ़ कर फ़ारिग हुए थे? उन्होंने कौन सी किताब पढ़ी थीं?

सही बात यह है कि उनके लिये न तो ज़ाहिरी तौर पर कोई मदरसा था न ही उनके लिये कोर्स मुकर्रर था न कोई निसाबे तालीम था,

न किताबें कुरबान हैं, इसलिये कि उस सहाबी ने नबी- ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कि सोहबत उठाई

और सोहबत के नतीजे में हुज़ूरे अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की एक अदा को देखा

और फिर उस अदा को अपनी ज़िन्दगी में अपनाने की और इस तरह वह सहाबी बन गये।

(दीन सीखने और सिखाने का तरीक़ा सफ़ा न० 8)

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.