काफ़िर को आख़िरत में सवाब नहीं मिलेगा जानिए नबी ﷺ ने क्या फ़रमाया

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Kafir will not get any good Sawab in AAkhirat Know what the Prophet
Aakhirat
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Kafir will not get any good Sawab in AAkhirat Know what the Prophet (Sallallahu Alaihi Wasallam) Say

Kafir will not get any good Sawab in AAkhirat Know what the Prophet say :

In Muslim Sharif,

Hazrat Anas (Razi) is inspired that Rasool Allah (Sallallahu Alaihi Wasallam) has said that

when a good person works,

his good deeds are done in the world because of him,

and the righteous people of Islam are entitled to their rights.

He deposits for his last life and he gets revenge in the world too.

Benefits – This Hadith Sharif means that Allahabad does not waste anybody’s goodness.

He is a great judge.

Kafir will not get good luck in the end.

That is why he rewards his good work only in the world and

the revenge of the good work of the Muslims is found in the world

and in the end it will also be found.

Subhan Allah! Being a Muslim is also a fair standard of status.

(Baghe-Jannat Yaani Khudaai Bagh, Safa No. 165)

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Hindi Translation

काफ़िर को आख़िरत में सवाब नहीं मिलेगा जानिए नबी ﷺ ने क्या फ़रमाया

मुस्लिम शरीफ़ में हज़रत उन्स(रज़ि०) से रिवायत है

कि रसूल अल्लाह(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)ने फ़रमाया

कि काफ़िर जब कोई नेक काम करता है

तो उसकी वजह से दुनिया में उसकी रोज़ी कुछ ज़्यादा कर दी जाती है

और मुसलमान की नेकियों को हक़ तआला उसकी आख़िरत के लिए जमा कर लेता है

और दुनिया में भी उसको बदला मिलता है।

फ़ायदा– इस हदीस शरीफ़ का मतलब यह है

कि अल्लाहतआला किसी की नेकी बर्बाद नहीं करता।

वह बड़े इन्साफ़ वाला है।

काफ़िर को अच्छे काम करने का आख़िरत में सवाब नहीं मिलेगा।

इसीलिए उसके नेक काम का बदला दुनिया में ही देता है और मुसलमान के नेक काम का बदला दुनिया में भी मिलता है और आख़िरत में भी मिलेगा।

सुबहान अल्लाह! मुसलमान होना भी ठया आला दर्जे की नैमत है।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़,सफ़ा न० 165)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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