कुरआन के सज्दों और उनके तरीकों के बारे में जो आया है जानिए 

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What has come about the Sajde of Qur'an and their methods
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What has come about the Sajde of Qur’an and their methods

What has come about the Sajde of Qur’an and their methods:  Abdullah bin Masud Razi said,

“The Prophet (sallallahu alaihi wasallam) said in the Mecca mukrama,

Sura Najam would have done so, that he would be saved,

all those who were with you, made them all clean, except for an old man,

that he had a bunch of cloves or clay He took up his profession and started saying,

‘This is enough of me.’ After that, I saw that he was killed in the condition of a misfortune.

Advantages:

Tilavata are mostly Sunnah near most imams.

This Quran should be read in different parts of the Qur’an Karim:

“The righteous and the lively Khalqhu and the Shaka Samahu and the Bassarah Bihlalei and the Quwtayeh”

Rasoolullah (sallallahu alaihi wasallam), when the Surah al-Najm was formed,

then the Musharik would be afraid of this With the Muslims, he too fell into a fierce battle.

(Allah is better know)

(Mukhtasar Sahi Bukhari : Page No 436)

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Hindi Translation

कुरआन के सज्दों और उनके तरीकों के बारे में जो आया है।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ि. से रिवायत है,

उन्होंने फ़रमाया कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मक्का मुकर्रमा में सूरा नज्म तिलावत कि तो सज्दा फरमाया,

आपके साथ जो लोग थे, उन सबने सज्दे किया, एक बूढ़े आदमी के अलावा,

कि उसने एक मुटठी भर कंकरियाँ या मिटटी लेकर अपनी पेशानी तक उठायी और कहने लगा,

मुझे यही काफी है। उसके बाद मैंने उसे देखा कि वह कुफ्र कि हालत में मारा गया।

फायदे:

तिलवात के सज्दे ज्यादातर इमामों के नजदीक सुन्नत है।

कुरआन करीम में अलग-अलग जगहों पर तिलावत के सज्दे में यह दुआ पढ़नी चाहिए

“सजदा वजहिया लिल्लाजी खलकहु व शक्का समअहु व बसरहु बिहौलेही व क़ुव्व्तेहि”

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जब सूरा ए-नज्म की तिलावत फरमायी तो मुशरिक इस कद्र डरे की मुसलमानों के साथ वह भी सज्दे में गिर गये।

(अल्लाह बेहतर जानने वाला है)

(मुख़्तसर सही बुखारी सफ़ा न० 436)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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