एक फ़र्ज़ के बारे में कैसे की जाये मय्यत के क़र्ज़ की अदायगी

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Jis Shakhs Ki Maut Is Haal Mein Aaye To Janiye Allah Taala Usse Kya Farmaya
myyat
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About a farz repayment a loan

About a farz repayment a loan :

एक फ़र्ज़ के बारे में मय्यत का कर्ज़ उस के माल से अदा करना

हज़रत अली रज़ि. फ़र्माते हैं के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कर्ज़ को वसिय्यत से पहले अदा करवाया,

हांलाके तुम लोग (कुरआन पाक में) वसिय्यत का तज़किरा कर्ज़ से पहले पढ़ते हो।

(तिर्मिज़ी: 2922)

फायदा:

अगर किसी शख्स ने क़र्ज़ लिया और उसे अदा करने से पहले इन्तेकाल कर गया,

तो कफ़न व दफ़न के बाद माले वरासत में से सब से पहले कर्ज़ अदा करना ज़रूरी है,

चाहे सारा माल उस की अदायगी में खत्म हो जाए।

(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा, सफ़ा न० 671)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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About a farz Lending a loan

Hazrat Ali Razi said The Prophet (sallallahu alaihi wa sallam) first of all paid the loan before the legacy, but “you all read (The Qur’an) the legacy before loan.

(Tirmizi: 2922)

Advantage:

If a person took a loan and spent his life before paying it,

then after the funeral and burial,

it is necessary to repay before all of the male relatives,

even if all the goods end in his repayment.

(Sirf Panch Minute Ka madarsa, Page No. 671)

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