मज़बूत ईमान और आख़िरत की फ़िक्र पढ़ें और शेयर करें

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Strong faith and The worry of AAkhirat
Makkah
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Strong faith and The worry of AAkhirat

Strong faith and The worry of AAkhirat

मज़बूत ईमान और आख़िरत की फ़िक्र 

लेकिन उनका ईमान इतना मज़बूत हो चूका था

और उन्हें आख़िरत की इतनी फ़िक्र हो चुकी थी कि उन्होंने कहा

चाहे यह हमें सूली पर चढ़ा दे लेकिन हमारी आख़िरत न बिगड़े।

क्योंकि आख़िरत का मामला हमेशा का है।

तो एक मन्ज़िल तो माँ के पेट की है और एक मन्ज़िल दुनिया के पेट की।

इसके अन्दर आदमी अपनी मर्जी पर चले या अल्लाह तआला की मर्ज़ी पर चले,

इन्हीं दो रास्तों पर यह चलेगा कभी इस रास्ते पर कभी उस रास्ते पर।

कुछ लोग सीधे रास्ते पर चलेंगे कुछ लोग टेढ़े रास्ते पर।

(दावत व तब्लीग़, सफ़ा न० 34)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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English Translation

Strong faith and The worry of AAkhirat

But their faith had been so strong and they were so concerned about the Aakhirat that they said

that even though it would give us a crucifixion

but our endless dysfunctions Because the matter of the Aakhirat is always.

So a destination is of the mother’s stomach and one destination of the stomach of the world.

In it, the man will go on his own wish or go on the wish of Allah,

it will never run on this path, on this path, on that path.

Some people will walk straight on the road some people on a crooked path.

(Dawat and Tabligue, Safa No 34)

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