जानिए क्या है जान बुझ कर नमाज़ क़ज़ा कर देने की सज़ा

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Intentionally giving up prayers is Gunah E Kabira
Namaz
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Intentionally giving up prayers is Gunah E Kabira

एक फ़र्ज़ के बारे में जान बुझ कर नमाज़ क़ज़ा कर देना

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़र्माया:

“जो शख्स दो नमाज़ को बिला किसी उज्र के एक वक्त में पढ़े वह कबीरा गुनाहों के दरवाजों में से एक दरवाज़े पर पहुँच गया।”

(मुस्तदरक: 1020, अन इब्ने अब्बास रज़ि.)

(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा, सफ़ा न० 481)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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English Translation

Intentionally giving up prayers is Gunah E Kabira

Prophet (Sallallahu Alaihi Wasallam) said:

“The person who read two prayers at one time of the light, reached Gunah E Kabir’s door.”

(MustDarak: 1020, An Ibne Abbas Razi.)

(Only five minutes of madarsa, Page No. 481)

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