एक फ़र्ज़ के बारे में नमाज़े अस्र की अहेमियत जानिए कितनी है

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NAMAZ
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ek farz ke bare mein asar ki namaz ki ahmiyat

एक फ़र्ज़ के बारे में नमाज़े अस्र की अहेमियत 

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़र्माया: जिस शख्स ने की अस्र की नमाज़ छोड़ दी, तो उस का अमल जाए हो गया।”

(बुखारी: 553, अन बुरैदा रज़ि.)

फायदा: दिन और रात में तमाम मुसलामनों पर पाँचों नमाज़ों को अदा करना तो फ़र्ज़ है ही,

लेकिन खास तौर से अस्र की नमाज़ छोड़ने वालों के हक़ में रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) वईद बयान फरमाना इस की अहेमियत को मज़ीद बढ़ा देता है,

चुनांचे हमारे लिए ज़रूरी है के अस्र की नमाज़ वक्त पर अदा करें और कज़ा न करें।

(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा, सफ़ा न० 401)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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