सीरिया के सफर के दौरान : पादरी ‘बुहेरा’ के आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से कुछ सवाल

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Aap Sallallahu Alaihi Wasallam ke Syria ke safar ka ek kissa
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Aap Sallallahu Alaihi Wasallam ke Syria ke safar ka ek kissa

सीरिया का सफ़र

चचा अबुतालिब कारोबार के लिए सीरिया देश जाने वाले थे।

सफर लम्बा और तकलीफ़देह था,

लेकिन प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ज़िद करके चचा के साथ हो लिए।

उस समय आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की उम्र सिर्फ बारह साल की थी।

जब यह कारोबारी क़ाफ़िला बुसरा पहुंचा

तो वहां वह ईसाइयों की एक पुरानी इबादतगाह में एक पेड़ के साये तले टहर गया।

उस गिरजे का पादरी ‘बुहेरा’ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मुबारक चेहरे को बड़े ध्यान से देख रहा था

और जब क़ाफ़िला उस पेड़े के नीचे ठहरा तो वह चौंक पड़ा और बड़बड़ाने लगा:

”इस पेड़ के नीचे तो किसी नबी का क़ाफ़िला ही ठहर सकता है।”

उस रात उसने पूरे क़ाफ़िले की दावत कर दी।

खाने के बाद बुहेरा ने अबुतालिब को अपने पास बुलाया और पूछा-

”यह लड़का आपका कौन है?”

”यह मेरा बेटा है।” अबुतालिब ने जवाब दिया।

”नहीं,ऐसा नहीं हो सकता।” बुहेरा ने इन्कार से सिर हिलाते हुए कहा।

“इनके बाप का तो इन्तिक़ाल हो जाना चाहिए था।”

”आप ठीक कहते हैं।” अबुतालिब ने हैरत के साथ जवाब दिया। ”यह मेरा भतीजा है।

इनकी पैदाइश से पहले ही इनके बात का इन्तिक़ाल हो चुका है।

मैंने इन्हे अपने बेटे की तरह पाला है।”

”सच कहते हैं आप।” बुहेरा ने कुछ सोचते हुए कहा।

इसके बाद उसने प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से ख्वाबों और फ़रिश्तों के बारे में बहुत से सवाल किए।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जवाबों से उसे और ज़्यादा इत्मीनान हो गया और बोला-

”खुश ख़बरी हो आपको कि आप नबियों के सरदार बनने वाले हैं।

काश, मैं उस समय तक ज़िन्दा रह सकूं।”

फिर वह चचा अबुतालिब से बोला-

”आप अपने भतीजे की ख़ास तौर पर निगरानी रखें।

यह अल्लाह के आख़िरी नबी होने वाले हैं। ऐसा न हो कि यहूदी इनको कोई नुक़सान पहुंचा दें।”

अबू तालिब बुहेरा की बातों से कुछ ऐसे डरे कि अपना सारा कारोबारी सामान जल्दी-जल्दी बेच दिया और भतीजे को लिए हुऐ मक्का वापस आ गए।

(हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम: सफ़ा न० 18)

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