अच्छे माहौल की अहमियत

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Achche mahol ki ahmiyat
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Achche mahol ki ahmiyat

अच्छे माहौल की अहमियत

हम कोई तबलीग़ी जमाअत मैं शामिल करने की दावत नहीं दे रहे हैं।

न हम ख़ुद कोई तबलीग़ी जमाअत से मुआवज़ा ले रहे हैं,

न हमें कोई सेक्रेटरी बनाना , वहां तो कोई मेम्बर नहीं तो सेक्रेटरी कहाँ से आए?

सरदार कहा से आए? प्रेज़िडेंट कहाँ से आए?

मैं अल्लाह और उसके रसूल के सामने जवाब देह हूँ,

मुझे इसके लिए तैयारी करनी है आज की गलत,

फ़िज़ाओं ने हमारा माहौल ख़राब कर दिया।

आज घरों मैं किताब तो मिल जाएगी माहौल कहाँ से लाऊँ?

मैं ज़ोहद तो पढूंगा मगर ज़ाहिद कहाँ से लाऊँ?

मैं तक़्वा तो पढूंगा मगर मुत्तक़ी कहाँ ढंढून?

मैं हया पढूंगा में हया वाला कहाँ से देखूंगा?

में पाकदामनी तो पढूंगा पाकदामनों की सोहबत कहाँ से लाऊँ?

में सखावत तो पढूंगा, में सखी कहाँ से लाऊँ?

मेरे भाईयो ऐसे ही तैरना तो पढ़े,

पानी न देखे तैरेगा कहाँ से।

तैरना तो पढ़ लिया पानी कोई नहीं,

तैरे कहाँ से। ईमानी सिफ़ात पढ़ने से नहीं आतीं।

अल्लाह के रास्ते में निकलने से आती हैं।

(मौलाना तारिक़ जमील साहब के इबरत अंगेज़ बयानात, सफ़ा न० 218)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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