अमानत में ख़्यानत की सज़ा जानिए क्या है

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Ek gunah ke bare mein khud ko burai se n bachane ka anjam
jahannam
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amanat mein khayanat ki saza

अमानत में ख़्यानत की सज़ा 

मेरे भाईयो! अपने अल्लाह को राज़ी करें। जिन दुकानों के पीछे नमाज़ छूट गयीं जिन दुकानों के पीछे सच को तलाक़ हुई,

जिन दुकानों के पीछे दयानत चली गई, ख़्यानत आ गई, बद दियानती आ गई।

अल्लाह तआला क़यामत के दिन बद दियानत से कहेगा वह तूने जो अमानत खाई लेकर आ।

कहेगा या अल्लाह तआला फरमाएगा जहन्नम में पड़ी हुई है ।

अब वह जहन्नम में कैसे जाए तो फ़रिश्ते मारेंगे चल

और वह उसको लेकर चलेंगे

और चलते चलते दोज़ख का बड़ा खतरनाक हिस्सा “हाविया” वहां लेकर उसको जाएंगे जहाँ मुनाफ़िक़ रहते हैं।

ईमान होने के बावजूद अमानत खाने वाले लोग “हाविया” में चले जाएंगे जो मुनाफिक़ीन की आग है।

वहां देखेगा कि वह जिस का माल दुनिया में दवाया था वह वहां पड़ा है।

अच्छा यहां पड़ा है। इतने में वह तबाह हो जाएगा।

उसको उठाएगा, कन्धे पर रखेगा फिर ऊपर चढना शुरू करेगा।

जब दोज़ख के किनारे पर आ जाएगा तो वह इसके हाथ से छूट जाएगा और फिर “हाविया” में जा गिरेगा।

इसको फ़रिश्ते मार कर फिर कहेंगे जा वापस लेकर आ।

अब यह कभी इसमें से नहीं निकल सकता। इस कमाई से तौबा करें यह कामना जहन्नम में ले जाएगा।

एक अक़ल के भी खिलाफ है कि अल्लाह तआला कहें कि बद दियानती और ख़्यानत हराम हैं

और फिर खुद फैसला करें कि इसके मुक़ददर में बद दीयन्ती का रिज़्क़ लिख दूँ या नामुमकिन है।

खुद अल्लाह तआला कहें रिश्वत हराम है

और फिर उसके मुक़ददर में रिशवत लिख दें तो यह तो नहीं हो सकता, यह नामुमकिन है

यह दुनिया का कोई आदिल बादशाह नहीं कर सकता कि एक चीज़ से लोगों को रोक दे फिर खुद ही लोगों को स्पलाई कर दे।

फिर उसकी पिटाई भी करे तो ज़मीन व आसमान का बादशाह कैसे कर सकता है।

रिज़्क़ हलाल लिखा जा है।

यह हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा कि रिवायत है-

अल्लाह किसी के लिए सऊदी रिज़्क़ नहीं लिखता, किसी के लिए रिश्वत नहीं लिखता।

यह फैसला अल्लाह नहीं करता। वह खुद कहता है कि

मैं ज़ालिम नहीं हूँ मैं आदिल हूँ मैं रहीम हूँ लेकिन बन्दा बेसब्र होकर इनको अपना लेता है।

(मौलाना तारिक़ जमील साहब के इबरत अंगेज़ बयानात, सफ़ा न० 206)

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