अम्मी और दादा के गुज़र जाने के बाद चचा अबू तालिब की आप ﷺ से मुहब्बत

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Chacha Abu Talib ki Aap SAW se muhabbat
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Chacha Abu Talib ki Aap SAW se muhabbat

अम्मी और दादा चल बसे

जब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पुरे छः साल के हो गये तो अपनी अम्मी जान के ‘साथ अपने ननिहाल मदीना तशरीफ़ ले गये।

वहां से वापस होते हुऐ रास्तें ही में अबवा नामक जगह पर बीबी आमिना का इन्तिकाल हो गया।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपने वालिद की लौन्डी गलत उम्मे ऐमन के साथ मक्का वापस आये,

और अब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दादा आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की देख-भाल करने लगे।

किस्मत की बात, मां के इन्तिकाल को अभी दो साल ही गुज़रे थे कि दादा जान भी चल बसे।

अब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपने सगे चचा अबू तालिब की निगरानी में परवरिश पाने लगे।

चचा जान आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को अपनी औलाद से भी ज़्यादा चाहते थे।

चचा अबू तालिब प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को अपने से एक मिनट के लिए भी जुदा नहीं होने देते थे।

हर वक़्त अपने ही साथ रखते थे। साथ भी खाना खिलते और अपने पास ही सुलाते थे।

[हमारे हुज़ूर(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम),सफ़ा न० 16]

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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