चार कामों का एहतिमाम करो जानिए वो कौन-कौनसे हैं

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Quran Ki Aayat Ko Mobile Aur Computer Se Delete Karne Ka Kiya Hukm Hai?
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char kamon ka ehtemam karo 

चार कामों का एहतिमाम करो

पहला काम ज़िक्र की कसरत
पहला काम जो कसरत से करने का है

जिसकी तफ़सील मैंने आपको बतला दी है।

बस नमाज़ को अल्लाह के क़ुर्ब का ज़रिया समझकर पढ़ें।

दूसर काम क़ुरान मजीद की तिलावत करो

क़ुरान मजीद की कसरत से तिलावत करें

कि यह मेरे महबूब का खत तो बड़े शौक के तवज्जोह से पढ़ते हैं मगर ख़ालिक़ का कलाम बेतवज्जोह से पढ़ते हैं।

आपको और हमें इस कलाम कि ताक़त का अन्दाज़ा नहीं।

हम क़ुरआन के नगमे को नहीं जानते कि यह किस तरह रूह के तारों को चीरता है।

वह काफ़िर होकर क़ुरआन को जानते थे। क़ुरआन उनको हिला देता था तड़पा देता था।

अबू जहल ने हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु को कहा था

कि वाक़ई तू ही मक्का में ऐसा है जो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का क़त्ल कर सकता है

और कोई ऐसा नहीं। नफ़रत और दुश्मनी में इतना आगे थे। जिसके बारे में उम्मे लैला के शौहर ने कहा था-

खत्ताब का दादा तो मुसलमान हो जाएगा लेकिन खत्ताब का बेटा मुसलमान नहीं होगा।

(मौलाना तारिक़ जमील के इबरत अंगेज़ बयानात, सफ़ा न० 197)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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