महबूब की अनोखी सुन्नत पढ़ें और शेयर करें

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Mahbub ki anokhi sunnat
madina
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Mahbub ki anokhi sunnat

महबूब की अनोखी सुन्नत

एक बार आपने हसन रज़ियल्लाहु अन्हु को कमर पर बिठाया।

आप के दोनों हाथ और घुटने ज़मीन से लगे हुए हैं, सवारी बन गए।

पुरे कमरे का चक्कर लगाया। हसन व हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा को ऊपर बिठाया।

एक बार मैंने अपने छोटे बच्चे को इसी तरह कमर पर बिठाकर चक्कर लगाया कि चलो बच्चा भी ख़ुश महबूब कि सुन्नत भी ज़िन्दा होगी।

हज़रत ज़ैनब कि बेटी थीं इमाम। उनको आपने उठाया हुआ है और नफ़ली नमाज़ भी पढ़ी जा रही है।

जब आप रुकू में जाते हैं तो उनको उतार देते।

सज्दे से उठते तो फिर इमाम को उठाकर फिर नमाज़ शुरू कर देते हैं।

ऐसा बच्चों से प्यार करके दिखाया। आप मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे थे।

हसन व हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा आए एक ऊपर चढ़ गया

और एक सीने के नीचे चला गया तो आपने अपना सीना ऊपर करके हाथ खोल दिए ताकि वह अन्दर आराम से बैठ सकें।

सहाबा दौड़े उतारने के लिए। आपने हाथ के इशारे से रोक दिया कि कुछ मत करो।

आप लोग सारी दुनिया से हँसकर मिलते हो बीवी को दबा कर रखते हो कि हम मर्द हैं छोटे क्यों बनें।

(मौलाना तारिक़ जमील साहब के इबरत अंगेज़ बयानात, सफ़ा न० 550)

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