अल्लाह से काएनात में कोई चीज़ छुपी हुई नहीं है

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Allah se kaynaat me koi chiz chupi hui nahi hai
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Allah se kaynaat me koi chiz chupi hui nahi hai

अल्लाह से काएनात में कोई चीज़ छुपी हुई नहीं है

अल्लाह के इल्म की बुलन्दी

फिर इस सारी काएनात में कोई चीज़ उससे छिपी हुई नहीं है,

ज़मीन के अन्दर को भी जनता है

पानियों के अन्दर को भी जानता है,

कोई ज़ोर से बोले तो भी वह सुनता है

आहिस्ता बोले तो वह भी वह सुनता है,

कोई ज़ोर से बोले तो भी वह सुनता है,

कोई रात को छिप के चले तो वह भी देखता है,

कोई दिन के उजाले में चले तो वह भी देखता है,

अल्लाह अपनी बादशाही में बेमिस्ल है, बेमिसाल है।

वह, वह अल्लाह है जो सबको खिलाता है

खुद खाने से पाक है, वह, वह अल्लाह है

जो सबको पिलाता है खुद पीने से पाक है,

वह, वह अल्लाह है जो सबको देता है

खुद लेने से पाक है, वह,वह अल्लाह है

जो सबको पहनाता है खुद पहनावे से पाक है,

वह, वह अल्लाह है जो सबको सुलाता है

खुद सोने से पाक है, वह, वह अल्लाह है

जो सबको थकाता है खुद थकने से पाक है,

वह, वह अल्लाह है जो सबको मारता है

खुद मौत से पाक है, वह, वह अल्लाह है

जो सबको इम्तिहान में डालता है

खुद आज़माइश से पाक है, वह, वह अल्लाह है

जो सबकी ज़रूरते पूरी करता है

खुद हर ज़रूरत से पाक है, वह, वह अल्लाह है

जो सबको जोड़ा जोड़ बनाता है

खुद जोड़े से पाक है।

न उसकी कोई शबाहत है

न उसका कोई मिस्ल न उसकी कोई मिसाल है

न उसका कोई शरीक है न उसका कोई सलाहकार है

न उसका कोई मुहाफ़िज़ है न उसका कोई मददगार है

न वह किसी से दबता है न किसी से घबराता है

न किसी से डरता है न कभी करके पछताया है

न ख़ता खाई करे तो भूलता नहीं करे तो ग़लत नहीं करता।

वह अपने आपको माबूद कहलवाने में हमारी बन्दगी का मुहताज नहीं,

अपने आपको अकबर और कबीर कहलवाने के लिए हमारी तकबीरों का

और अज़ानों का मुहताज नहीं,

अपनी तारीफ़ करवाने के लिए हमारी तस्बीह का मुहताज नहीं।

(मौलाना तारिक़ जमील साहब के इबरत अंगेज़ बयानात, सफ़ा न० 55)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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