ग़ैब पर ईमान लाना क्या है? जानिए

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Ghaib par iman lana kya hai 
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Ghaib par iman lana kya hai

ग़ैब पर ईमान लाना क्या है? 

जैसे पहली रात का चाँद देखने के लिए खड़े हुए।

एक आदमी तेज़ निगाह वाला, एक आदमी कमज़ोर निगाह वाला।

तेज़ निगाह वाले ने बताया कि देखो वह चाँद है।

कमज़ोर निगाह वाला कहता है कि भाई मेरे को तो दिखाई नहीं देता।

वह कहता है कि पेड़ के ऊपर बादल के बीच में देख ले।

बोले पेड़ दिखाई देता है, बदल दिखाई देता है, चाँद नहीं दिखाई देता।

अब यह कहने लगा कि झूठे कहाँ है। दिखाई तो देता नहीं।

मग़रिब कि नमाज़ के बाद गए ज़रा मतला (उदयस्थल) साफ़ हो गया।

बोले इधर आ, दिखाई दे रहा है? जी हाँ! दिखाई दे रहा है, तू सच्चा है।

तो उस आदमी ने उसकी खबर को सच्चा नहीं माना बल्कि अपनी नज़र को सच्चा माना।

आदमी कि खबर को सच्चा मानता तो जब चाँद नहीं दिखाई देता था

उस वक़्त भी कहता कि भाई! मेरी निगाह कमज़ोर है और तू है सच्चा।

तो आज अगर इसने नबी कि बात को और अल्लाह की बात को सच्चा माना इसके बावजूद की जन्नत और जहन्नम दिखाई नहीं देते,

फ़रिश्ते दिखाई नहीं देते, तो फिर उसकी क़ीमत अल्लाह देंगे।

उसपर अल्लाह दुनिया में भी हालत बनाएँगे और मरने के बाद के भी हालात बनेंगे।

जो अल्लाह व रसूल की बात को सच्चा माने इसका नाम “ईमान बिलग़ैब “(ग़ैब पर ईमान लाना) है

(दावत व तब्लीग, सफ़ा न० 111)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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