जानिए प्यारे नबी ﷺ के दोस्तों के बारे में

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Janiye pyare nabi ﷺ ke dosto ke bare me
Janiye pyare nabi (sallallahu alaihi wasallam) ke dosto ke bare me
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Janiye pyare nabi ﷺ ke dosto ke bare me

जानिए प्यारे नबी ﷺ के दोस्तों के बारे में

प्यारे नबी के दोस्त

प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दोस्त बहुत ही नेक ,

शरीफ़ और पाकीज़ा अख़लाक़ वाले थे।

वे सब मक्का में इज़्ज़त की नज़र से देखे जाते थे।

(1) हज़रत अबूबक्र (रज़ि०)

इनका असली नाम अब्दुल्लाह था।

इनसे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की गहरी दोस्ती थी।

यह उम्र में आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कुछ साल छोटे थे।

मक्का में उनको बड़ी इज़्ज़त हासिल थी।

ये साये की तरह हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहते थे।

कारोबार में भी आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ शरीक रहे

और आख़िर दम तक आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का साथ नहीं छोड़ा।

(2) हज़रत हुकैम बिन हिज़ाम (रज़ि०)

ये बीबी खदीजा (रज़ि०) के चचेरे भाई थे।

उम्र में हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पांच साल बड़े थे।

इनका शुमार कुरैश के रईसों में होता था।

प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को इनसे बड़ी मुहब्बत थी।

हिजरत के आठवें साल मुसलमान हुए।

(3) हज़रत ज़िमाद बिन सालवा (रज़ि०)

इन्हें भी प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से बड़ी मुहब्बत थी।

ये अपने ज़माने के अच्छे हकीम और सर्जन थे।

प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के रसूल होने के बाद एक बार ये मक्का में आये।

दिखा कि हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रास्ते में चले जा रहे थे

और पीछे लड़को का गरोह था।

मक्का वाले आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दीवाना और मजनून कह रहे थे।

यह हालत देखकर इनको बड़ा तरस आया।

ये समझे कि ख़ुदा न ख्वास्ते हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सचमुच दीवाना हो गये थे।

ये आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आये और बोले:

मोहम्मद, मै जुनून का बहुत अच्छा इलाज कर लेता हु ।

” हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने निगाह उठाकर मुस्कराते हूए उनको दिखा।

फिर अल्लाह कि तारीफ़ करके क़ुरआन मजीद कि कुछ आयेते पढ़ी।

हज़रत ज़िमाद (रज़ि०) सब कुछ भूल गये और उसी वक़्त मुसलमान हो गये।

(हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सफ़ा न० 26)

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