नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और हज़रत ख़दीजा (रज़ि०) का एक वाक्य, पढ़ें

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Nabi Sallallahu Alaihi Wsllam Aur Hazrt Khadija Rzi० Ka Ek wakya
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Nabi Sallallahu Alaihi Wsllam Aur Hazrt Khadija Rzi० Ka Ek wakya

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और हज़रत ख़दीजा (रज़ि०) का एक वाक्य

हज़रत ख़दीजा (रज़ि०)

बीबी ख़दीजा मक्का की बहुत ही मालदार और इज़्ज़त वाली औरत थी।

ये बेवा थी। इनके दो शाहरों का इन्तिक़ाल हो चुका था।

दूर के रिश्ते से ये प्यारा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) चचेरी बहन होती थीं।

बीबी ख़दीजा अपनी शराफ़त,पाकदामनी और खुशअख्लाकी की वजह से ‘ताहिरा’ (पाकदामन) के नाम से मशहूर थीं।

बीबी ख़दीजा (राज़ी०) के यहां भी कारोबार होता था।

वे अपना माल दुसरो के ज़रिये से बेचती थीं।

उन्होंने प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सच्चाई ‘ ईमानदारी और अमानतदारी की चर्चाएं सुनी तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास पैग़ाम भेज़ा की,

”अगर आप मेरा माल लेकर क़ारोबार के लिए जायें तो आपको दूसरों के मुक़ाबले में दोगुना मुनाफ़ा दूंगी।”

प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तैयार हो गये और उनका माल लेकर सफऱ पर चल पड़े।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ बीबी ख़दीजा (रज़ि०) का एक नौकर ‘मैसरा भी था।

अल्लाह की महेरबानी, इस बार मुनाफ़ा बहुत हुआ और फ़िर मैसरा ने हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तारीफ़ों के तो पुल बांध दिये।

कहने लगा-”बीबी! मैंने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जैसा, सच्चा,अमानतदार और नेक आदमी देखा ही नहीं।

ग्राहकों के साथ बहुत नर्मी से पेश आते थे।

बातें बनाना या धोका देना तो जानते ही नहीं।

मैं इतने दिनों उनके साथ रहा, उन्होंने कभी मुझे एक बात भी नहीं कही।

सच कहता हूँ बीबी, वे इन्सान नहीं, फ़रिश्ता हैं, फ़रिश्ता ।”

बीबी ख़दीजा (रज़ि०) मैसरा की बातें बड़े गौर से सुनती रही और कुछ सोचती रहीं ।

(हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, सफ़ा न० 28)

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