जब क़ब्रिस्तान में जाते हैं तो क़बर देखकर क्या याद करना चाहिए

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KABR ME SAWAL JAWAB AUR AZAB-E-KABAR KA BAYAN
qabar
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Kabristan Mein apani maut ko yaad karein

क़ब्रिस्तान में अपनी मौत को याद करें

एक और अदब इस हदीस में हमारे लिए यह है कि क़ब्रिस्तान में जाकर हमें अपनी मौत को याद करना चाहिए,

अपनी कबर को सोचना चाहिए, आज कल इस अदब हमरे अन्दर बड़ी ग़फ़लत पाई जा रही है।

जब हम क़ब्रिस्तान की तरफ़ जाते है तो भी दुनिया की बातें करते हैं।

और क़ब्रिस्तान में पहुंच कर भी दुनिया ही की बातें करते हैं।

वहां की कबूरों को देखकर हमें अपनी क़बर और मौत याद नहीं आती।

जबकि क़ब्रिस्तान जाने का अस्ल अदब यही है कि वहां जाकर अपनी मौत को याद करें।

अपने मरने को सोचें, और मरने के बाद अपने क़बर के हालात को सोचें।

और यह सोचें कि आज ये लोग जो क़ब्रों में दफ़न है,

एक वक़्त वह था जब ये भी हमारी तरह दुनिया में खाते पीते थे,

रहते सहते थे,लेकिन आज अपनी कब्रों के अन्दर अज़ाब में हैं या सवाब में हैं कुछ पता नहीं।

हमें भी एक दिन यहां पहुंचना है, जिस तरह मैं एक जनाज़े को लेकर यहां लाया जाएगा।

एक दिन मौत आजाएगी, उस वक़्त न बीवी साथ आयेगी और न माल साथ आयेगा, ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे क़ब्र तक आ जायेंगे।

(अज़ाबे क़बर,सफ़ा न० 09)

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