माह-ए-सफर की बिदअतें तीन चीज़ो में नहूसत का मतलब

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MAAH -E- SAFAR KI BIDATEN Teen Cheezo mai Nahusat Ka Matlab
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MAAH -E- SAFAR KI BIDATEN Teen Cheezo mai Nahusat Ka Matlab

माह-ए-सफर की बिदअतें तीन चीज़ो में नहूसत का मतलब

और बाज़ रिवायत में आया है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया के नहूसत तीन चीज़ो में है-

औरत,घर और घोड़ा, जैसा के क़ुतुब हदीस में मरवी है_,’

(बुखारी-2/232, तहावी-2/317)

” इस हदीस की तशरीफ़ में उलमा का इख्तिलाफ है,

हज़रत आयेशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया है

के अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मतलब ये नहीं के इन चीज़ो में नहूसत है,

बल्की अपने सिर्फ अहले जाहिलियत का क़ौल नक़ल किया है के ये जाहिल लोग इस तरह कहते है-

(तहावी-2/318)

और इमाम तहावी ने फ़रमाया के मतलब ये है

के अगर बिल फ़र्ज़ किसी चीज़ में नहूसत होती तो इन चीज़ो में होती,

जब इनमे भी नहूसत नहीं तो किसी में भी नहीं है

(तहावी-2/318)

इसकी ताईद इस हदीस से होती है

जिसमे अल्लाहताला के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद फ़रमाया

के बदफाली कोई चीज़ नहीं, अगर किसी चीज़ में नहूसत होती तो औरत, घर और घोड़े में होती

(बुखारी-1/400, मुस्लिम-2/232, तहावी-2/318, तिर्मिज़ी-2750)

ये हदीस बता रही है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का मक़सद इन चीज़ो में नहूसत बताना नहीं

बल्की इनसे नहूसत की नफ़ी (इन्कार) करना मक़सूद है के अगर किसी चीज़ में नहूसत होती तो इनमे होती जब इनमे भी नहीं है

तो किसी चीज़ में भी नहीं है अल गरज़ किसी चीज़ में नहूसत ख्याल करना और उससे बदफाली लेना इस्लामी नुक़्ता ए नज़र से सही नहीं है,

इसी तरह सफर के महीने को मनहूस जान कर उससे बदफाली लेना भी सही नहीं है,

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