कुरआन मजीद को कितने मुहावरों पर नाजिल किया गया। जानिए हदीस पढ़कर

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Quran Majeed Ko Kitne Muhawaron Par Nazil  Kiya Gaya
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Quran Majeed Ko Kitne Muhawaron Par Nazil  Kiya Gaya

कुरआन मजीद को कितने मुहावरों पर नाजिल किया गया। जानिए हदीस पढ़कर

कुरआन मजीद को सात मुहावरों पर नाजिल किया गया।

उमर बिन खत्ताब रज़ि से रिवायत है, उन्होंने फरमाया कि मैंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जमाने में हशाम बिन हकीम रज़ि को सूरह फुरकान पढ़ते सुना।

जब मैंने उसके पढ़ने पर गौर किया तो मालूम हुआ कि उनका तिलावत करने का अन्दाज उससे कुछ अलग था,

जिस तरह रसूलुल्लाह ने हमे तालीम फरमाया था।

मैंने इरादा किया कि नमाज ही में उनको पकड़कर ले जाऊ।

लेकिन मैंने सब्र से काम लिया। जब उन्होंने नमाज से सलाम फैरा तो मैंने उनके गले में चादर डालकर पूछा कि यह अन्दाजे तिलावत तुम्हें किसने सिखाया?

उन्होंने कहा, मुझे रसूलुल्लाह (सलल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने पढ़ाया, मैंने कहा,

तुम झुटे हो। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने तो खुद मुझे यह सूरत एक और अन्दाज के उल्टे है।

फिर मैं उन्हें खींचकर रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास लाया और कहा,

ऐ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)!

यह सूरह फुरकान को एक जुदागाना तर्ज पर पढ़ते हैं जो आपने हमें नहीं पढ़ाया।

आपने फरमाया, हशाम को छोड़ दो।

इसके बाद आपने हशाम रज़ि. से कहा, पढ़ो।

उन्होंने उसी तरीके से पढ़ा, जिस तरह मैंने उसने सुना था।

तो आपने फरमाया, यह सूरह इसी तरह उतरी है।

फिर फरमाया, यह कुरआन सात मुहावरों पर उतरा है,

उनमें से जो मुहावरा तुम पर आसान हो, उसके मुताबिक पढ़ लो।

फायदे:

“सबअतु अहरुफीन” के बारे में बहुत इख्तलाफ है।

अलबत्ता इसका कायदा यह है कि जो लफ्ज सही सनद से मनकूल हो और अरबी में उसकी मुनासिब खुलासा किया जा सकता हो,

निज ईनाम के मुस्हफ की लिखावट के खिलाफ न हो, वो सात मुहावरों में शुमार होगा। वरना रदद् कर दिया जायेगा।

( फत्हुलबरी 9/32)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 1486)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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