कुरआन मजीद को याद रखने और बाकायदा पढ़ने का बयान।

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Quran Majeed Ko Yaad Rakhna Aur Bakayada Padhna Ka Bayan
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Quran Majeed Ko Yaad Rakhna Aur Bakayada Padhna Ka Bayan

कुरआन मजीद को याद रखने और बाकायदा पढ़ने का बयान।

इब्ने उमर रज़ि से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया, हाफिज कुरआन कि मिसाल उस आदमी कि सी है जिसने अपने ऊंट की टांग को बांध रखा हो।

अगर उसकी निगरानी करता रहेगा तो उसे रोके रखेगा और अगर उसे आजाद छोड़ देगा तो वो कही चला जायेगा।

फायदे:

इस हदीस के पेशे नजर हाफिजे कुरआन को चाहिए कि वो पाबन्दी से कुरआन करीम की तिलावत करता रहे।

क्योंकि अगर उसे पढ़ना छोड़ दिया जाये तो भूल जायेगा। ऐसा करने से सारी मेहनत बर्बाद हो जाती है।

(फतहुलबारी 9/79)

अब्दुल्लाह बिन मसअुद रज़ि से रिवायत है, उन्होंने कहा, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया,

किसी आदमी का यह कहना की मैं फलां फलां आयत भूल गया हूँ, नामुनासिब बात है।

बल्कि इस तरह कहना चाहिए की वो मुझे भुला दी गई है।

कुरआन को लगातार याद करते रहो, क्योंकि कुरआन ( गफलत बरतने वाले) लोगो के सिनो से निकल जाने में वहशी ऊंटों से भी ज्यादा तेज है।

फायदे:

कसरत गफलत और अदम तवज्जुह की वजह से कुरआन करीम भूल जाता है।

अगर यूं कहा जाये कि मैं कुरआन भूल गया हूँ तो अपनी कोताही पर खुद गवाही देना है।

इसलिए यूं कहा जाये कि अल्लाह ने मुझे भुला दिया है,

ताकि हर फअल खालिक हकीकी की तरफ मनसूब हो।

अगरचे कुरआन व हदीस की रु से ऐसे काम की निस्बत बन्दों की तरफ करना भी जाईज है।

(फतहुलबारी 5/24)

अबू मूसा रज़ि से रिवायत है,

वो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से बयान करते हैं कि आपने फरमाया कुरआन को हमेशा पढ़ते रहो।

इसलिए कि उस जात की करम,

जिसके हाथ में मेरी जान हैं कुरआन निकल कर भागने में उन ऊंटों से ज्यादा तेज हैं जिसके पांव की रस्सी खुल चुकी हैं।

फायदे: इस हदीस में तीन चीजों की तरह करार दिया गया हैं।

हाफिजे कुरआन को ऊंट के मालिक से और कुरआन करीम को ऊंट से और उसके याद रखने को बांधने से।

निज इसमें कुरआन करीम को पाबन्दी से पढ़ने की तलकीन की गई हैं

(फतहुलबारी 9/83)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 1495)

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