किस किस्म का गुमान करना जाईज है?

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Kis Qism Ka Guman Karna Jaiz Hai

Kis Qism Ka Guman Karna Jaiz Hai

किस किस्म का गुमान करना जाईज है?

आइशा रज़ि से रिवायत है, उन्होंने कहा, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया,

मैं गुमान करता हूँ कि फलां और फलां आदमी हमारे दीन की कोई बात नहीं जानते।

दूसरे रिवायत में है, जिस दीन पर हम हैं, वो उसे नहीं पहचानते।

फायदे: मतलब यह है कि अगर दूसरों को किसी बुरे किरदार से खबरदार करना हो तो बदगुमानी का इजहार जुर्म नहीं हैं, अलबत्ता किसी की बेइज्जती और रुस्वाई के लिए बुरा गुमान शरीअत में नापसन्दीदा हरकत हैं।

(फतहुलबारी 10/ 586)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 1648)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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