जिस शख्स ने क़ुरआन करीम (की तफ़्सीर) में अपनी राय से कुछ कहा तो जानिए नबी ﷺ ने क्या फ़रमाया

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Jis Shakhs Ne Quran Karim Ki Tafsir Mein Apani Ray Se Kuch Kaha

जिस शख्स ने क़ुरआन करीम (की तफ़्सीर) में अपनी राय से कुछ कहा तो जानिए नबी ﷺ ने क्या फ़रमाया

हज़रत जुंदुब रज़ि. से रिवायत है कि

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

जिसने क़ुरआन करीम (की तफ़्सीर) में अपनी राय से कुछ कहा और हक़ीक़त में सही भी हो, तब भी उसने गलती की।

(अबूदाऊद)

फायदा-

मतलब यह है की जो शख्स क़ुरआन करीम की तफ़्सीर अपनी अक़्ल

और राय से करता है फिर इत्तिफ़ाक़न वह सही हो जाए, तब भी उसने गलती की,

क्योंकि उसने उस तफ़्सीर के लिए न हदीसों की तरफ़ रुजूअ किया।

(मज़ाहिरे हक़)

(मुन्तख़ब अहादीस सफ़ा न० 280)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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