जानिए क़ुरआन का हाफ़िज़ जिसे याद भी खूब हो और पढ़ता भी अच्छा हो उनके बारे मैं क्या आया…

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Janiye Quran Ka Hafiz Jise Yaad Bhi Khub Ho Aur Padhta Bhi Achcha Ho
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Janiye Quran Ka Hafiz Jise Yaad Bhi Khub Ho Aur Padhta Bhi Achcha Ho

जानिए क़ुरआन का हाफ़िज़ जिसे याद भी खूब हो और पढ़ता भी अच्छा हो उसके बारे मैं क्या आया…

हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा रिवायत करती हैं

कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु लैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया:

क़ुरआन का हाफ़िज़ जिसे याद भी खूब हो और पढ़ता भी अच्छा हो,

उसका हश्र क़ियामत में उन मुअज़्ज़ज़ फरमांबरदार फ़रिशतों के साथ होगा

जो क़ुरआन शरीफ़ को लौहे महफूज़ से नक़ल करने वाले हैं

और जो शख्स क़ुरआन शरीफ़ को अटक-अटक कर पढ़ता है

और उसमें मशक़्क़त उठता है, उसके लिए दोहरा अज़्र है।

(मुस्लिम)

फायदा:

अटकने वाले से मुराद वह हाफ़िज़ है

जिसे क़ुरआन शरीफ़ अच्छी तरह याद न हो,

लेकिन वह याद करने की कोशिश में लगा रहता हो।

नीज़ इससे मुराद वह देखकर पढ़ने वाला भी हो सकता है

जो देखकर पढ़ने में भी अटकता हो,

लेकिन सही पढ़ने की कोशिश कर रहा हो,

ऐसे शख्स के लिए दो अज़्र हैं।

एक अज़्र तिलावत का है,

दूसरा अज़्र बार-बार अटकने को वजह से मशक़्क़त बरदाश्त करने का है।

(तैय्यिब, मिरक़ात)
(मुन्तख़ब अहादीस, सफ़ा न 296)

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