जिन्नात का बयान। जानिए हदीस पढ़ कर शेयर जरूर करें

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Jinnat Ka Bayan janiye
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Jinnat Ka Bayan janiye

जिन्नात का बयान।

अब्दुल्ला बिन मसअूद रज़ि से रिवायत है,

उनसे पूछा गया कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को जिन्नों की खबर किसने दी थी

कि उन्होंने आज रात कुरआन सुना?

तो उन्होंने फरमाया कि एक पेड़ ने आपको खबर दी थी।

अबू हुरैरा रज़ि से रिवायत है

कि वो रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ आपके वजू

और इस्तंजा (पेशाब) के लिए पानी का लोटा उठाकर जा रहे थे।

बाकी हदीस (124) गुजर चुकी है।

अबू हुरैरा रज़ि से ही कुछ इजाफे के साथ रिवायत है

कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया,

मेरे पास शहर नसीबीन के जिन्न आये और वो कैसे अच्छे जिन्न थे।

उन्होंने मुझ से सफर खर्च की ख्वाहिश की तो मैंने उनके लिए अल्लाह से यह दुआ की कि जिस हड्डी या गोबर से उसका गुजर हो तो उस पर वो खाना पायेंगे।

फायदे:

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास जिन्न कई बार हाजिर हुए।

एक बार बतने नखला में जहां आप कुरआन पढ़ रहे थे।

दूसरी बार हुजून में, तीसरी बार बकीअ में, चौथी बार मदीना मुनव्वरा के बाहर।

उसमें जुबैर बिन अव्वाम रज़ि मौजूद थे, पांचवी बार एक सफर में जिसमे बिलाल बिन हारिस रज़ि मौजूद थे।

(फतहुलबारी, 4/367)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 1247)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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