हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कि एक ज़नाज़े से वापसी और एक औरत की दावत

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RASOOL ALLAH SALLALLAAHUALIHIWASALLAM SE ARZ KIYA GAYA
sallallahu alaihi wasallam
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Huzoor Sallallahu Alaihi Wasallam Ki Ek Janaze Se Wapsi Aur Ek Aurat Ki Dawat

हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कि एक ज़नाज़े से वापसी और एक औरत की दावत

हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक जनाज़े से वापस तशरीफ़ ला रहे थे

कि औरत का पैगाम खाने कि दरख्वास्त लेकर पहुंचा हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) खुद्दाम समेत तशरीफ़ ले गए और खाना सामने रखा गया,

तो लोगों ने देखा कि हुज़ूरे अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) लुक़्मा चबा रहे हैं, निगला नहीं जाता।

हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फर्माया, ऐसा मालूम होता है

कि इस बकरी का गोश्त मालिक कि बग़ैर इजाजत ले लिया गया।

उस औरत ने अर्ज़ किया, या रसूलुल्लाह!

मैंने रेवड़ मैं बकरी खरीदने आदमी को भेजा था,

वहां मिली नहीं पड़ोसी ने बकरी खरीदी थी,

मैंने उसके पास क़ीमत से लेने को भेजा,

वह तो मिले नहीं उनकी बीवी ने बकरी भेज दी।

हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़र्माया क़ैदियों को खिला दो।

फायदा:

हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कि उलुवे शान के मुक़ाबले मैं एक मुशतबहा चीज़ का गले मैं अटक जाना कोई ऐसी अहम् बात नहीं कि हुज़ूर अदना गुलामों को भी इस क़िस्म के वाक़िआत पेश आ जाते हैं।

(फ़ज़ाइले आमाल, सफ़ा न० 77)

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