नबी अकरम ﷺ एक मर्तबा क्यों तमाम रात रोते रहे, जानिए हदीस पढ़ कर

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Nabi Akram Sallallahu Alaihi Wasallam Ek Martaba Kyon Tamam Raat Rote Rahe

नबी अकरम ﷺ एक मर्तबा क्यों तमाम रात रोते रहे

नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक मर्तबा तमाम रात रोते रहे

और सुबह तक नमाज़ में यह आयत तिलावत फर्माते रहे-

इन तुअज़्ज़िबहुम फइन्नहुम इबादु क-व इन तग्फ़िर लहुम फइन्न क अन्तल अजीजुल हकीम,

ए अल्लाह! अगर आप उनको सज़ा दे,

जब भी आप मुख़्तार है कि यह आपके बन्दे है और आप इनके मालिक,

और मालिक को हक़ है कि बन्दों को जरायम पर सज़ा दे

और अगर आप उनको माफ़ फ़र्मा दे तो भी आप मुख़्तार है कि आप 1. सूरज ग्रहण,

जबर्दस्त कुदरत वाले है तो माफ़ी पर भी कुदरत है

और हिकमत वाले है तो माफ़ी भी हिकमत के मुवाफिक होगी।

इमामे आज़म रज़ि के मुताल्लिक भी नक़ल किया गया है कि वह एक शब तमाम रात वमताजुल यौ म अव्युहल मुजरिमून० पढ़ते रहे

और रोते रहे। मतलब आयते शरीफ़ा का यह है

कि क़यामत के दिन मुजरिमो को हुक्म होगा कि दुनिया में तो सब मिले-जुले रहे मगर आज मुजरिम लोग सब अलग हो जाए

और ग़ैर मुजरिम अलाहिदा। इस हुक्म को सुनकर जितना भी रोया जाए थोड़ा है कि न मालूम अपना शुमार मुजरिमो में होगा या फ़र्माबरदारों में।

( फ़ज़ाइले आमाल, सफ़ा न० 43)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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