मेरे दोस्तों, ज़रा हम सोचे !! के अल्लाह ने हमे अक़ल दी ही कितनी है?

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Mere dosto, zara hum soche!! Ke Allah ne hume aqal di hee kitni hai?
Allah
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Mere dosto, zara hum soche!! Ke Allah ne hume aqal di hee kitni hai?

मेरे दोस्तों, ज़रा हम सोचे !! के अल्लाह ने हमे अक़ल दी ही कितनी है?

हमारी अक़्ल नाक़िस {अधूरी} है,

आज जब दीन की बात कही जाती है.

अल्लाह के हुक्मो की, वादों की,

हुज़ूरे पाक रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कि खबरों की,

जन्नत, जहनन्म की, क़ब्र हशर की बात कि जाती है

तो हम अपनी अक़ल के घोड़े दौड़ाने लगते है,,,

के ये अक़ल में आने वाली बाते नहीं है!!

अस्तग़फ़िरुल्लाह!

मेरे दोस्तों, ज़रा हम सोचे!! के अल्लाह ने हमे अक़ल दी ही कितनी है?

अल्लाह ने अक़ल को बनाया

तो उसके 100 हिस्से किये और 99 हिस्से तने तनहा अपने हबीब रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिए

और सिर्फ एक हिस्सा पूरी दुनिया को तक़सीम किया है,

इस 1 हिस्से में बड़े बड़े साइंटिस्ट, फिलोसोफर, उलेमा और हम और आप भी शामिल है,,,

मेरे दोस्तों!

जहा हमारी अक़ल की हद्द ख़त्म होती है

ईमान की हद्द वह से शुरू होती है,

इसीको आज़माया जाता है,,,

सफी मेराज सहाबा के ईमान की आज़माइश था,

जिसने हुज़ूर रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बात को हक़ तस्लीम किया वो कामयाब हो गया

और जिसने इन्कार किया वो इस्लाम छोड़ कर नाकाम हो गया,,,

खंदक के मौके पर एक बड़ी चट्टान को तोड़ते वक़्त

हुज़ूरे पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने खबर दी के रोअम, ईरान-इराक़ मिस्र फ़तेह होगा,

तो उस वक़्त मुनाफिक हँसते थे

, के पेट पर तो पत्थर बन्धे है

और ईरान,रोअम जो उस वक़्त की सबसे बड़ी ताक़त थी,

को फ़तेह करने की बात करते है,,,

लेकिन दुनिया ने देखा के अल्लाह के नबी रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की खबर सच हुई,,,

जिसको कारी तय्यब साहब दब ने खूब बयान किया,

तुम नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की अक़ल की बात करते हो?

और नबी की सोहबत की बरकत से सहाबा रदिअल्लाहु तला अन्हुम को वो अक़ल मिली थी

के अगर उनकी अक़ल की ज़कात निकाल कर तक़सीम की जाये तो क़यामत तक कोई पागल पैदा नहीं होगा,,

अल्लाह हमे सच्चा यक़ीन नसीब फरमाए,

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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