कुफ़्फ़ारे मक्का ने देखा कि मुसलमानों की तादाद बढ़ती ही जा रही हैं तो नबी ﷺ के खिलाफ…

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Kuffar e Makkah ne dekha ki musalmano ki tadad badhti hi ja rahi hain to Nabi ﷺ ke khilaf...
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Kuffar e Makkah ne dekha ki musalmano ki tadad badhti hi ja rahi hain to Nabi ﷺ ke khilaf…

शुअबे बनी हाशिम में महसूर:

उमर शरीफ के 47 वें साल 615 ई० में

कुफ़्फ़ारे मक्का ने देखा कि मुसलमानों की तादाद बढ़ती ही जा रही हैं

और हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कुछ असर नहीं हो रहा है

उन लोगों ने मिल कर तय किया कि हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

और आपके ख़ानदान का बाईकाट किया जाए

और उन्हें किसी तारिक जगह पर महसूर किया जाए

और उनका दाना पानी बन्द कर दिया जाए

और मुआहेदा लिखा।

चुनांचे तीन साल तक शुअबे अबू तालिब में आपको

और आपके साथियों को अबू तालिब के साथ महसूर किया गया।

मुआहेदा यह लिखा गया कि

(1) कोई बनू हाशिम के यहां शादी न करे।

(2) उन लोगों से किसी किस्म का लेन देन न करे।

(3) किसी किस्म का मेल जोल न रखे।

कोई खाने पिने की अशिया न ले जाए।

इस मुआहदे पर तमाम सरदाराने कुरैश ने दस्तख़त करके

काबा के अन्दर आवेज़ा कर दिया।

अबू तालिब मज्बूरन भतीजे की ख़ातिर तमाम

ख़ानदान के साथ तीन साल शुअबे (धाई) में महसूर रहे।

तीन साल बाद अबू तालिब ने लोगों से कहा मेरा भतीजा कह रहा है

उस मुआहेदे को दीमक चाट गई।

जब देखा गया तो पुरे मुआहेदे को दीमक चाट गई थी

सिर्फ अल्लाह तआला का नाम छोड़ दिया था। तीन साल बाद आप निकले।

(तारीख़े आलम,सफ़ा न० 121)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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