हज़रत दावूद अलैहिस्सलाम का इतिहास हिंदी में भाग-2

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Hazrat Dawood Alaihissalam history In hindi part-2
Prophet Dawood Alaihisslam
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Hazrat Dawood Alaihissalam history In hindi part-2

हज़रत दावूद अलैहिस्सलाम का इतिहास हिंदी में भाग-2

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हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम की बादशाहत का दब-दबा

क़ुरआन शरीफ में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है,

“और हमने उसकी सल्तनत को मज़बूत किया और उसे हिकमत और क़ौले फैशल दिया”

(सूरह साद, आयत-20)

36 हज़ार (36,000) आदमी रात को हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम की खिदमत करने वाले होते, सुबह होती तो आप उनको फरमाते की तुम लौट जाओ तो तुम अल्लाह का नबी राज़ी है, बाज़ रिवायत में ज़िक्र है कि हज़रत हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम को हिफाज़त करने वाले 40 हज़ार (40,000) कि तादात में होते थे।

इतनी तादाद में लोग अपने शौक व मोहब्बत कि वजह से आपकी हिफाज़त के लिए आते थे, इस में अपनी सा’आदत समझते और बैसे बरकत समझते, (अल्लाह तआला के नबी हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम को इतनी तादात कि ज़रूरत नहीं थी लेकिन आपके गुलामों को आपकी खिदमत कि ज़रूरत थी)

अल्लाह तआला ने आपको ऐसी खिताब फेशल से नवाज़ा जिसकी वजा से आप लोगों को कामिल तौर पर अल्लाह तआला के अहकाम पहुँचाने कि क़ुदरत रखते थे।

हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम को अल्लाह तआला ने इल्म व अमले सालेह, एतेक़ाते सालेह अता करके जिस तरह क़ूवते बॉटनिया को कमाल बख्शा उसी तरह खिताब फेशल अता करके आपकी बोलने कि क़ुव्वत को कमाल अता किया।

(तज़किरातुल अम्बिया अलैहिस्सलाम, सफ़ा-287,288)

(बहुत प्यारा वाकिया है)

लोहे का हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम के हाथ में नरम हो जाना

क़ुरआने मजीद में अल्लाह सुबहाना व तआला इरशाद फरमाता है,

“और बेशक हमने दाऊद (अलैहिस्सलाम) को अपना बड़ा फ़ज़ल दिया ऐ पहाड़ों उसके साथ अल्लाह कि तरफ रुज़ू करो और ऐ परिंदों, और हमने उसके लिए लोहा नरम किया”

(सूरह सबा, आयत-10)

हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम जब से बानी इसराइल के बादशाह बने तो अपने ये अमल शुरू किया कि रात को आम आदमी कि हैसियत से बहार तशरीफ़ ले जाते, जो शक्श मिलता उस से पूछते दाऊद बादशाह कैसा है??

एक मर्तबा हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम कि मुलाकात एक फ़रिश्ते से हुई जो इंसानी शक्ल में था, जब अपने उससे सवाल किया तो उसने कहा आदमी तो बहुत अच्छा है सिर्फ एक बात उसमे न पायी जाये तो बहुत कामिल इन्सान है, हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम ने पूछा वो क्या बात है?

उसने कहा कि वो बैतूल माल से रिज़्क़ खता है, अपने हाथ कि कमाई से खाये तो उनके फ़ज़ाइल में तकमील(इज़ाफ़ा) पाया जायेगा।

हज़रात दाऊद अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला से दुआ की

“ऐ अल्लाह मुझे जारह(कवाज़च / ARMOR) बनाने का इल्म अता फार्मा दे मुझ पर जरह बनानी आसान फार्मा दे,

अल्लाह तआला ने आपको जारह(कवच) बनाने का इल्म अता फार्मा दिया और लोहे को आपके हाथ में नरम फार्मा दिया, आप उसकी आमदनी (INCOME) का तिहाई हिस्सा मुसलमानो की मस्लेहत में खर्च फरमाते, एक जारह (कवच) रोज़ तैयार फरमाते थे, 1000, 4000 और 6000 दिरहम तक आपकी बनायीं हुई जराहे(कवच) बिकती, उसकी आमदनी में से आप अपनी ज़ात पर खर्च करते और अपने अहल व अयाल का खर्च उसी से पूरा फरमाते, ज़रूरतमंद और गरीबों को भी उस माल से देते, 360 जराहे पने तैयार फ़रमाई थी, उनको बेच कर आपने इतने दिरहम हासिल कर लिए थे की आप बैतूल माल के मोहताज न रहे, बल्कि उससे क्षीर(ज़्यादा) रकम गरीबों को देते।

(रूहुल मानी, जिल्द-12, हिस्सा-1, सफ़ा-115,116)

हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम के हाथ में लोहा मॉम और गुंधे हुए आटे की तरह नरम हो जाता था, आग में नरम करने और हथोड़े से कूटने की ज़रूरत पेश नहीं आती थी, हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम जैसा चाहते उस तरह लोहे को हाथ से इधर-उधर फेर कर जारह(कवच) बना लेते थे, अल्लाह तआला के हुक्म के मुताबिक आप बहुत खूबसूरत जारह बनाते, न बहोत बड़ी न बहुत छोटी, इसमें कील भी एक ख़ास मिक़्दार की लगते, बाज़ मुफ़स्सिरीन किराम ने कहा की हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम को कील लगाने की ज़रूरत ही दरपेश नहीं आती थी, लोहा नरम हो जाता जैसे चाहते उसको उसी तरह फेर लेते।

(तज़किरातुल अम्बिया अलैहिस्सलम, सफ़ा-228,289)

सुब्हानअल्लाह…

ये हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम का मोजिज़ा है।

जिस लोहे को नरम करने के लिए आग और हथोड़े से पीटने की ज़रूरत पड़ती है, और दाऊद अलैहिस्सलाम आग व हथोड़े के बगैर अपने हाथ मुबारक से लोहे को नरम कर देते हैं।

और ये अल्लाह तआला की अज़ीम क़ुदरत है कि अपने प्यारे नबी के लिए लोहे को भी नरम कर दिया।

हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम कि खिलाफत और अदल व इन्साफ का हुक्म

क़ुरआन पाक में अल्लाह अज़्ज़वजल इरशाद फरमाता है,

“ऐ दाऊद (अलैहिस्सलाम) बेशक हमने तुझे ज़मीं में नायाब किया तो तू लोगों में सच्चा हुक्म कर और खुवाहिश के पीछे न जाना कि तुझे अल्लाह कि राह से बेखा देगी बेशक वो जो अल्लाह कि राह से बहकता है उनके लिए सख्त अज़ाब है इस पर कि वो बेकार न बनाये ये काफिरों का गुमान है तो काफिरों कि खराबी ही आग से, क्या हम उन्हें जो ईमान लाये और अच्छे काम किये उन जैसा करदे जो ज़मीन में फसाद फैलते हैं या हम परहेज़गारों को शहरीर बहुकमो(बदकारो) के बराबर ठहराए, ये एक किताब है कि हमने तुम्हारी तरफ उतरी बरकत वाली ताकि इसकी आयतों को सोचे और अकल्मन्द नसीहत माने”

(सूरह साद, आयत-26,27,28,29)

हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम को बताया जा रहा है कि आप किसी शाही ख़ानदान के फारद(इन्सान) नहीं हो कि तुम्हे ये हुकूमत और तख़्त वरासत में मिला हो, तुम एक गैर म’अरुफ़ चरवाहे थे, हमने अपने फज़ल व करम से आपके लिए ये राह हमवार की और अपनी मेहेरबानी से बनी इसराइल का ताजदार बनाया, और बड़ी सल्तनत फर्मादी, और मुसनद व खिलाफत से नवाज़ा, इस एहसान का शुक्र अदा करने का ये तरीका है की हर फेसला अदल व इन्साफ के मुताबिक करो, और अपनी पसंद व नापसंद को किसी तरह अशर अंदाज़ न होने दो, अगर तुमने अपनी खुवाहिश पर इंसाफ को कुर्बान किया तो याद रखना अल्लाह ताला की राह से बहक जाओगे, उसकी तौफीक का दमन तुम्हारे हाथ से छुट जायेगा, और जो शख्स राहे हक से बहक जाता है वो अल्लाह ताला के सख्त अजाब में मुत्बिला कर दिया जाता है।

(ताज्किरातुल अम्बिया अलैहिस्सलाम, सफा-297)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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