क्या ज़ीना से तौबा क़ुबूल होगी! पढ़ें एक वाकिया

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Kya Zina se tauba qubool hogi! Padhen ek wakiya
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Kya Zina se tauba qubool hogi! Padhen ek wakiya

क्या ज़ीना से तौबा क़ुबूल होगी! पढ़ें एक वाकिया

एक औरत का अजीब वाक़िअ 1.

हज़रात अबू हुरैरह रज़ीअल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं के

एक औरत मेरे पास आयी और उसने मुझसे पूछा:

क्या मेरी तौबा क़ुबूल हो सकती है?

में ने जीना किया था, जिससे मेरे यहाँ बच्चा पैदा हुआ था,

फिर में ने उसको क़तल कर डाला.

मेने कहा नहीं.(तुमने दो बड़े गुनाह किये इस लिए)

न तो तुम्हारी आँख ठंडी हो,

और न तुझे शराफत व करामात हासिल हो,

उस पर वो औरत अफ़सोस करती हुई उठकर चली गयी

फिर में ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ फजर की नमाज़ पढ़ी.

और उस औरत ने जो कुछ कहा था और में ने उसे जो जवाब दिया था

वो सब हुज़ूर रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को बताया.

आप रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया

तुमने उसे बुरा जवाब दिया, क्या तुम ये आयत नहीं पढ़ते

और जिस शख्स के क़तल करने को अल्लाह तआला ने हराम फ़रमाया है

उसको क़तल नहीं करते.

हां मगर हक़ पर, और वो जीना नहीं करते,

और जो शख्स ऐसा काम करेगा तो सज़ा से उसको सबका पड़ेगा

के क़यामत के रोज़ उसका अज़ाब बढ़ता चला जायेगा,

और वो उस अज़ाब में हमेशा हमेशा ज़लील (व ख्वार) होकर रहेगा.

मगर जो (शिर्क और मा आसीसे) तौबा कर ले और ईमान भी ले आये

और नेक काम करता रहे तो अल्लाह तआला ऐसवल लोगो के गुज़िश्ता गुनाहो की जगह नेकिया

इनायत फरमायेगा और अल्लाह तआला ग़ाफ़ुरूर रहीम है.

सौराह फ़ुरक़ान 68-70.

इब्ने जरीर की रिवायत है की

वो अफ़सोस करते हुए उनके पास से चली गया और वो कह रही थी के है अफ़सोस!

क्या ये हुसन जहनुम के लिए पैसा किया गया है?

इस रिवायत में आगे ये है के

हुज़ूर रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास से

हज़रात अबू हुरैरह रज़ीअल्लाहु तआला अन्हु वापस आये और घरो में औरत को ढूंड न शुरू किया,

उसे बहोत ढूंढा लेकिन वो औरत कही नहीं मिली.

अगली रात को वो खुद हज़रात अबू हुरैरह रज़ीअल्लाहु तआला अन्हु के पास आयी

तो हुज़ूर रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जो जवाब दिया था

वो हज़रात अबू हुरैरह रज़ीअल्लाहु तआला अन्हु ने उसे बता दिया.

वो फ़ौरन सजदे में गिर गयी और कहने लगी

तमाम तारीफे अल्लाह के लिए है जिसने मेरे लिए खलासी की शकल बना दी.

और जो गुनाह मुझसे सरज़द हो गया था उससे तौबा का रास्ता दिया.

और उस औरत ने अपनी एक बन्दी और उसकी बेटी आज़ाद की. और अल्लाह के सामने सच्ची तौबा की.

(तफ़्सीरे इब्ने कसीर 4/22)

(बिखरे मोती 2/113-114- 115)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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