हैज के ग़ुस्ल के वक्त औरत का अपने बाल खोलना कैसा है, जानिए हदीस पढ़ कर

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Haiz Ke Waqt Aurat Ka Apne Bal Kholna Kaisa Hai
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Haiz Ke Waqt Aurat Ka Apne Bal Kholna Kaisa Hai

हैज के ग़ुस्ल के वक्त औरत का अपने बाल खोलना कैसा है

आइशा रज़ि. से रिवायत है

कि हम जुलहिज्जा के चांद के करीब हज को निकले तो

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया

कि जो आदमी उमरे का एहराम बांध ले और अगर मैं खुद हदी (कुर्बानी जानवर) न लाया होता

तो उमरे का एहराम बांधता। इस पर कुछ लोगों ने उमरे का एहराम बांधा और कुछ ने हज का।

उसके बाद आइशा रज़ि. ने पूरी हदीस बयान की  और अपने हैज का भी जिक्र किया और फ़रमाया

कि आपने मेरे साथ भाई अब्दुर्रहमान रज़ि. को तनईम के मक़ाम तक भेजा।

वहां से मैंने उमरे का एहराम बांधा और इन सब बातों में न कुरबानी लाजिम हुई,

न रोजा रखना पड़ा और न ही सदका देना पड़ा।

फायदे:

इस हदीस में हैज के ग़ुस्ल के वक़्त अपने बाल खोलने का भी बयान है।

जिसे इबारत में कमी की वजह से हज़फ़ कर दिया गया है।

क्योंकि इसका बयान ऊपर हो चूका है।

(मुख़्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 170)

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