हदीसो में जुम्मे की बड़ी फ़ज़ीलत बयान की गयी है…

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Jab Banda Namaz Mein Surah Fatiha Padhta Hai
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Hadison mein Zomme Ki Badi Fazilat Bayan Ki Gayi Hai

हदीसो में जुम्मे की बड़ी फ़ज़ीलत बयान की गयी है..

जुमा को असर की नमाज़ के बाद जो शख्स ये

दुरूद 80 पढ़ेगा” अल्लाहुम्मा सल्ली आला

मुहम्मदिन नाबिईल उम्मियी व आला

आलिहि वसललिम तस्लीमा” तो उसके 80 साल

के गुनाह माफ़ होंगे और 80 साल की इबादत उसके

आमाल-नामे में लिखी जाएगी.

जिसने जुम्मे की नमाज़ (2 रकअत जुम्मा) से पहले

4 सुन्नत नमाज़ और जुम्मा क बाद ,,

4 सुन्नत, 2 सुन्नत, 2 नफिल पड़ी …

अल्लाह उस पर जहन्नम की आग हराम कर

देगा.. !

जुमा को कसरत से दुरूद पढ़े. क्यूंकि

जुमा को फ़रिश्तो की एक जमाअत सिर्फ इसी काम में

होती है की हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पैर पढ़ा जाने वाला

दुरूद आप के पास पहुँचती है. सबसे अफ़ज़ल

दुर्रुद इब्राहिम है.

जुमा को गुसल ज़रूर करे. हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया” जिस शख्स ने जुमा को (पाक होने के बावजूद सिर्फ सवाब की नियत से) गुसल किया तो उसके अगले पिछले सब गुनाह माफ़ हो जाते हैं”

एक दूसरी हदीस में हैं की “जुमा का गुसल बालो की जड़ों में से भी गुनाहो को भी निकल फेकता है”

ज़कात देकर अपने मालो की हिफाज़त करो

सदक़े से अपने बीमारों का इलाज किया करो

(अबू दाऊद)

जो शख्स सुस्ती की वजह से 3 जुमा छोड़ देगा

अल्लाह तआला उस के दिल पर मोहर लगा देगा

(अबू दाऊद जिल्द:1 सफ़ा: न० 393 हदीस:1052)

जो जुमा के दिन या रात में

सौराह-दुख्खान पढ़ेगा

अल्लाह अज़्ज़वजल जन्नत में उसके लिए एक घर बनायेगा.

(अलमोजमुल कबीर)

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