दज्जाल मदीना के अन्दर दाखिल…

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Dajjal Madina Ke Andar Dakhil Nahi Ho Sakega
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Dajjal Madina Ke Andar Dakhil Nahi Ho Sakega

दज्जाल मदीना के अन्दर दाखिल नहीं हो सकेगा।

अबू हुरैरा रज़ि से रिवायत है

कि वह रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से बयान करते है कि आपने फरमाया

कि मदीना में दज्जाल का रोब और डर दाखिल नहीं होगा।

उस वक़्त मदीना के सात दरवाजे होंगे और हर दरवाजे पर दो फ़रिश्तें पहरा देंगे।

फायदे:

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जमाने में मदीना इर्द-गिर्द दीवार न थी और न ही उसमे दरवाजे नसब थे।

अब मदीना और मदीना वालो कि हिफाजत के लिए यह काम शुरू हो चुका है।

अबू हुरैरा रज़ि से रिवायत है,

उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:

“मदीना के दरवाजों पर फ़रिश्ते पहरा देंगे,

वहां न तो मर्ज ताउन दाखिल होगी और न ही दज्जाल आयेगा।

फायदे:

अल्लाह तआला ने मदीना वालों को ताउन कि वबा और फितना दज्जाल से महफूज रखा है।

यह रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दुआओ का नतीजा है कि अल्लाह तआला ने मदीना को आम वबाई आफतों से महफूज रखा है।

(औनुलबारी, 2/746)

अनस रज़ि. से रिवायत है कि वह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से बयान करते हैं

कि आपने फरमाया हर शहर में दज्जाल का गुजर होगा,

मगर मक्का और मदीना में कि। क्योंकि उनके हर रास्ते पर फरिस्ते सफ बस्ता पहरा देंगे।

फिर मदीना अपने मकीनों को तीन बार खूब जोर से हिला देगा और अल्लाह हर मुनाफिक और काफिर को उसमें से निकाल देगा।

फायदे:

यह हदीस इन हालत के खिलाफ नहीं जिनमें है कि मदीना में दज्जाल का रोब दाखिल नहीं होगा,

क्योंकि यह जलजले तो मुनाफिकिन को निकालने के लिए होंगे। ताकि मदीना मुनव्वर को उनकी गन्दगी से पाक किया जाये।

(औनुलबारी, 2/749)

अबू सईद खुदरी रज़ि. से रिवायत है,

उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें दज्जाल के बारे में एक लम्बी दज्जाल के बारे में एक लम्बी हदीस बयान फ़रमाई,

इस हदीस में यह भी था कि दज्जाल आयेगा और मदीना से बाहर एक शोरीली जमीन में ठहरेगा,

क्योंकि इस पर मदीना के अन्दर आना तो हराम कर दिया गया है।

फिर अहले मदीना से वह आदमी उसके पास जायेगा जो उस वक़्त के तमाम लोगों से बेहतर होगा।

वह कहेगा, मैं गवाही देता हूँ कि तू ही वह दज्जाल है,

जिसके बारे में रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें हदीस बयान फरमायी थी दज्जाल कहेगा,

बतलाओ अगर में उस आदमी को क़त्ल करके उससे दोबारा जिन्दा करूँ तो क्या तुम फिर भी मेरी उलूहियत में शक करोगे?

लोग कहेंगे, नहीं। चुनांचे दज्जाल उस आदमी को क़त्ल कर देगा और फिर जिन्दा कर देगा।

जब दज्जाल उसे दोबारा जिन्दा करेगा तो वह आदमी कहेगा,

अल्लाह कि कसम! अब तो मैं और ज्यादा तेरे हाल से वाकिफ हो गया हूँ।

दज्जाल कहेगा कि मैं फिर उसे क़त्ल करता हूँ, मगर फिर वह उस पर काबू न पा सकेगा।

फायदे:

दज्जाल मैं इतनी ताकत नहीं कि वह किसी को मारकर दोबारा जिन्दा कर सके,

क्योंकि जिन्दा करना और मारना तो अल्लाह कि खूबी है,

लेकिन अल्लाह तआला ईमान वाले को आजमाने के लिए दज्जाल के हाथों यह करिश्मा जाहिर करेगा ताकि ईमान वाले और मुनाफिकिन के बीच खत इम्तियाज साबित हो।

(मुख़्तसर बुखारी, सफ़ा न० 697)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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