घरों के सामने मैदानों और रास्तों में बैठना कैसा है जानिए हदीस पढ़ कर

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Gharon Ke Samne Maidanon Or Raaste Mein Baithna
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Gharon Ke Samne Maidanon Or Raaste Mein Baithna

घरों के सामने मैदानों और रास्तों में बैठना।

अबू सईद खुदरी रज़ि से रिवायत है,

वो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से बयान करते है कि आपने फरमाया,

तुम लोग रास्तों पर बैठने से परहेज करो,

सहाबा रज़ि ने अर्ज किया,

ऐ अल्ल्हा के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! इस बात में तो हम मजबूर है कि क्योंकि वही तो हमारी बैठने और गुफ्तगू करने की जगहे है।

आपने फरमाया, अच्छा अगर ऐसी ही मजबूरी है तो उसका हक अदा करो। लोगों ने अर्ज किया,

रास्ते का क्या हक है? आपने फरमाया, निगाहें नीची रखना, किसी को तकलीफ न देना।

सलाम का जवाब देना, अच्छी बात बताना और बुरी बात से रोकना।

फायदे:

एक रिवायत में अंधे को रास्ते पर लगाना,

छींक का जवाब देना और कमजोर और जईफ की मदद करना भी रास्ते के हकों में शामिल है।

(औनुलबारी, 3/257)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफा न० 876)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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