कुरबानी के जानवर की शराइत

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Qurbani Ke Janwar Ki Sharait
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Qurbani Ke Janwar Ki Sharait

कुरबानी के जानवर की शराइत:

कुरबानी का जानवर मोटा ताज़ा फरबा हो।

जिस जानवर के पैदाइशी सींग न हों तो जाइज़ है

अगर सींग पहले थे मगर किसी वजह से टूट गये

या अगर ज़्यादा टुटा तो नाजाइज़ अगर थोड़ा टुटा जिस से कोई ऐब नज़र न आए तो जाइज़ है।

अन्धा, लंगड़ा, काना, कान कटा हुआ, दुम कटी हुई दांत टूटे हुए, बकरी का थन कटा हुआ या सूखा हुआ,

गलाज़त खाने वाला वगैरह जानवरों की कुरबानी नाजाइज़ है।

अगर किसी जानवर का अज़्व एक तिहाई कम कटा हों उसकी कुरबानी के वक़्त अच्छा और उसकी वजह से उसमे कोई ऐब लग जाए तो जाइज़ है।

अगर कुरबानी के बाद पेट में ज़िन्दा बच्चा हों तो उसे भी ज़बह करे वरना फेंक दे।

अगर कुरबानी का जानवर खुदा नख़्वास्ता बेच दिया तो उसकी कीमत का सदक़ा दे।

साहिबे निसाब अपनी जानिब से दूसरे के नाम पर कुरबानी कर सकता है।

लेकिन उसके लिए शर्त है कि पहले उसे उसका मालिक बनाए।

मसलन अगर किसी बच्चे या भाई बहन की तरफ से कुरबानी देना चाहे तो जानवर उनके नाम हिबा करना होगा चाहे कुरबानी के वक़्त क्यों न हो।

हमारे आक़ा हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने खुद अपनी उम्मते मुस्लेमा की जानिब से कुरबानी फरमाई।

कुरबानी करते वक़्त अल्लाह तआला का नाम लेना फ़र्ज़ है।

किसी गैरुल्लाह के नाम पर कुरबानी नाजाइज़ है यानी कुरबानी करते वक़्त अल्लाह का नाम लेकर कुरबानी करना होगी।

गाय, भेंस ऊंट की कुरबानी में सात अफ़राद हिस्सा ले सकते है।

कुरबानी के गोश्त के तीन हिस्से हों एक खुद के लिए एक रिश्तेदारों के लिए और एक गरीब व मिस्कीन के लिए।

(तारीख़े आलम, सफ़ा न० 317)

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