औलाद की तरबियत…

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Imaan e Kamil – Akhlaq (Manners) – Hadith
Aulaad Ki Tarbiyat
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Aulaad Ki Tarbiyat

औलाद की तरबियत

अल्लाह के नाम से शुरू जो तमाम जहानो को बनाने वाला और उसे पालने वाला है!

और दुरूदो सलाम हो उसके आखरी नबी-ए-रेहमत रसूल-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर

आज कल अक्सर देखा जाता है के वालिदैन अपनी औलाद के ताल्लुक से परेशान रहते है के किस तरह उनकी तरबियत की जाये. किस तरह उन्हें अच्छा मोमिन बनाये।

और यही चीज़ यानी औलाद की तरबियत आज के जदीद दौर में एक संगीन मसला है, और इसकी शिद्दत हर गुजरने वाले साल में बढ़ती जा रही है।

इन’शा’अल्लाह-उल-अज़ीज़! हम इस उन्वान में औलाद की तरबियत के तहत कुछ नुकात (पॉइंट्स) आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे।

आपसे दरख्वास्त है के इसपर जरूर तवज्जो दे और जितना हो सके इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पोहोचने में हमारी मदद करे।

सबसे पहली बात ये के–औलाद अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की तरफ से एक नेमत है।

और जैसा के हर नेमत के ताल्लुक से अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमसे पूछ करेगा तो औलाद भी एक नेमत है

लिहाजा इसके ताल्लुक से भी सवाल किया जाने वाला है के– क्या और कैसे इसकी तरबियत की।

जिसके ताल्लुक से अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरान में फरमाता है।

ए वो लोगो जो ईमान लाये हो! अपने आप को और अपने अहलो ऑयल को जहन्नुम की उस आग से बचाओ जिसका ईंधन इंसान और पत्थर होंगे”

(अल-क़ुरान 66:6)

तो यहाँ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपने बन्दों पर ये फ़र्ज़ कर दिया है के, मेरे बन्दों अपने आपको और अपने बीवी बच्चो को जहन्नुम की आग से बचाओ।

यानी उनकी ऐसी तरबियत करो के वो हलाल और हराम में तफ़रीक़ कर सके अल्लाह और उसके रसूल की फरमाबरदारी करे और हर उस अमल से बचे जो दुनिया और आख़िरत के खसरे का सबब बने।

तो औलाद की तरबियत याद रखिये बहुत अहम और संगीन मसला है, इसकी अहमियत और जरुरत को समझिये, इसके दुनियावी और उखरवी फायदों को जानिए।

अगर हमने ऐसा न किया तो दुनिआ और आख़िरत का बड़ा नुकसान उठाना लाज़िम है।

औलाद की तरबियत न करने के नुक़सानात:

औलाद वालिदैन से झगड़ा करती है, वालिदैन को गालिया देती है,

आस-पड़ोस को, माहौल और मुआशरे के लोगो को तकलीफ पहुंचती है।

वालिदैन को रुस्वा करके लड़के लड़किया भागकर कर निकाह कर लेते है।

बूढ़े वालिदैन को घर से निकाल कर ओल्ड ऐज होम में छोड़ आते है,

हत्ता के चाँद दुनियावी मफद के लिए वालिदैन का क़त्ल तक कर लेते है

(अस्तग़्फ़िरुल्लाह)

ऐसे वाक़ियात की फेहरिस्त हम निकालेंगे तो बोहोत लम्बी होती जाएगी।

बहरहाल ये सिर्फ और सिर्फ औलाद की सही तरबियत न करने का नतीजा है।

और पता भी नहीं ऐसे कितने जरायम होते है जिसकी संगिनी और इन्तहा हम बयां भी नहीं कर सकते।

इस लिए क्यूंकि औलाद की सही तरबियत नहीं होती. और जब एक बच्चा अपने वालिदैन के साथ ये सुलूक करता होगा।

मु’अशरे और माहौल, पडोसी और मुसाफिरों का, साथ वाले लोगों का क्या सुलूक करता होगा वो तो सिर्फ गुमान ही किया जा सकता है।

तो औलाद की तरबियत ये बोहोत अहम् मसला है याद रखिये. और अगर हमने ये न किया तो दुनिआ और आख़िरत की बड़ी रुस्वाई है हमारे लिए।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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