हक़ बातो की पैरवी सब पर लाज़िम है, जानिए

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Haq Baato Ki Pairwi Sab Par Lazim Hai
madina
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Haq Baato Ki Pairwi Sab Par Lazim Hai

हक़ बातो की पैरवी सब पर लाज़िम है जानिए

मफ़हूम-ए-हदीस: एक मर्तबा हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अबू हुरैरह (रज़िअल्लाहु अन्हु) को सदक़ा-ए-फ़ित्र की हिफाज़त के लिए मुक़र्रर फ़रमाया!

अबू-हुरैरह (रज़िअल्लाहु अन्हु) रात भर उस माल की हिफाज़त फरमाते रहे।

एक रात एक चोर आया और माल चुराने लगा! अबू हुरैरह ने उसे देख लिया! उससे पकड़ लिया।

फ़रमाया – में तुझे हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की खिदमत में पेश करूँगा।

उस चोर ने मिन्नत-समाजत करना शुरू करदी।

कहा – अल्लाह ! मुझे छोड़ दो में साहिब-ए-आयल (बीवी-बच्चे वाला) हूँ और मोहताज हूँ।

अबू-हुरैरह को रेहम आगया और उसे छोड़ दिया।

सुबह अबू-हुरैरह जब बारगाह-ए-रिसालत में हाज़िर हुए तो हुज़ूर ने मुस्कुरा कर फ़रमाया

अबू-हुरैरह! वो रात वाले तुम्हारे क़ैदी (चोर) ने क्या किया?

अबू-हुरैरह ने अर्ज़ किया, या रसूल अल्लाह! उसने अपनी अयालदारी और मोहताजी बयान की तो मुझे रेहम आगया और मैंने छोड़ दिया।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया :-

उसने तुमसे झूट बोला! ख़बरदार रहना! आज रात वो फिर आएगा।

हज़रते अबू-हुरैरह कहते हैं की – “मे दूसरी रात भी उसके इंतेज़ार में रहा।

क्या देखता हूँ की वो वाकई फिर आ पहुंचा और माल चुराने लगा! मैंने फिर उसे पकड़ लिया।

उसने फिर मिन्नत-खुशामद की और मुझे फिर रेहम आगया और मैंने फिर छोड़ दिया, सुबह जब हुज़ूर की बारगाह में हाज़िर हुआ तो

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फिर फ़रमाया :-

अबू हुरैरह! वो रात वाले क़ैदी ने क्या किया?

मैंने फिर अर्ज़ किया, की या रसूल अल्लाह! वो अपनी हाजत बयान करने लगा तो मुझे रेहम आगया और मैंने फिर उसे छोड़ दिया।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया :-

उसने तुमसे झूट कहा, ख़बरदार! आज वो फिर आएगा।

हज़रते अबू-हुरैरह कहते हैं की – तीसरी रात वो फिर आया।

मैंने उसे पकड़ कर कहा की कम्बखत आज न छोडूंगा और हुज़ूर के पास ज़रूर ले कर जाऊँगा!

वो बोला, (ऐ) अबू-हुरैरह! मैं तुम्हे कुछ ऐसे कलिमात सिखाना चाहता हूँ जिनको पढ़ने से तुम नफा में रहोगे! सुनो।

जब सोने लगो तो आयतुल कुर्सी पढ़ कर सोया करो। इस से अल्लाह तुम्हारी हिफाज़त फरमाएगा और शैतान तुम्हारे नज़दीक नहीं आ सकेगा।

हज़रते अबू-हुरैरह कहते हैं वो मुझे यह कलिमात सिखाकर मुझसे रिहाई पा गया।

मैंने जब सुबह हुज़ूर की बारगाह में यह सारा किस्सा बयान किया तो हुज़ूर ने फ़रमाया :-

उसने यह बात सच्ची कही है! हालांकि खुद वो बड़ा झूठा है।

क्या तुम जानते हो, ऐ अबू-हुरैरा, की वो 3 रात आने वाला कौन था?

मैंने अर्ज़ किया – नहीं या रसूल अल्लाह! मैं नहीं जानता।

तो हुज़ूर ने फ़रमाया – “वो शैतान था।

(मिश्कात शरीफ पेज-177)

सबक़: लिहाज़ा साबित हुआ के हक़ बात कहने वाला चाहे शैतान ही क्यों न हो :-

उसे क़बूल करना चाहिए, और नाहक़ बात अगर कोई बादशाह-ए-वक़्त भी कहे तो उसकी मुखालिफत करना हम सब पर लाज़िम है.

इंशा’अल्लाह -उल-अज़ीज़।

अल्लाह तआला हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफ़ीक़ दे अमीन।

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