कामियाब निकाह दीनदारी की बुनियाद पर

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kamyab nikah deendari ki buniyad par
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kamyab nikah deendari ki buniyad par

कामियाब निकाह दीनदारी की बुनियाद पर

अक्सर देखा जाता है के निकाह के लिए गोरी और खूबसूरत लड़की का इंतेखाब करना कुछ ज्यादा ही अहम समझा जाता है, तो क्या वाकय में शरीयते इस्लामिया रंगत का तास्सुफ़ पसन्द करता है।

आईये इसकी हकीकत देखते है के क्या वाकय में इस्लाम ने रंगत के ऐतबार से भी कभी तास्सुब पसन्द किया।

सबसे पहली बात के अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त सौराह लुक़मान की आयात 22 में फरमाता है के

तुम्हारे ज़ुबान और रंगो का इख़्तेलाफ़ भी अल्लाह की निशानी है”

(अल-क़ुरान:31:22)

तो बहरहाल ये बात तो वजह है के

रंगत में वैरिएशंस ये अल्लाह की तरफ से है, लिहाजा रंगत के ऐतबार से कोई किसी से अफ़ज़ल और मफ़ज़ूल नहीं।

लेकिन बहरहाल अगर कोई ये पसन्द करे के उसके निकाह के लिए खूबसूरत (Gori) लड़की मिले तो इसमें कोई हर्ज़ नहीं।

लेकिन हर्ज़ यहाँ होता है के दीनदारी और अख़लाक़ वो तमाम चीज़ो को छोड़ कर सिर्फ खूबसूरती और गोरे रंग को तरजि दी जाती है।

और जो लोग निकाह के मुआमले में दीन को तर्जी नहीं देते उनके हाथ क्या लगता है बहरहाल बताने की जरुरत भी नहीं?

और यही होता है जो दीन को तर्जी नहीं देते और दुनिया के सब मुआमलो में उलज़ती है

के, लड़की का रंग, उसके खंडन का रंग, उसका नन्हियाल और ददियल, फलाह और फलाह हज़ार तहक़ीक़ की जाती है सुब्हान’अल्लाह

जबकि दीनदारी ही सबसे अव्वल है! उसके बाद सब कुछ मिल जाये,

अलहम्दुलिल्लाह! शरीयत गोरे रंग और खूबसूरती के खिलाफ नहीं है।

लेकिन दीनदारी न हो और बाकी सब कुछ हो तो नहीं चलेगा मेरे भाइयो याद रखिये

फिर बादमे पछताते है के

काश दीनदार लड़की से निकाह करता तो मेरी फरमाबरदारी करती, मेरी इज़्ज़त करती, मुझे लोगों में रुस्वा नहीं करती, अपनी इज़्ज़त-और-आबरू की हिफाज़त करती, मेरे औलाद की अच्छी तरबियत करती,

तो बरहाल निकाह के लिए दीनदारी को तरजि दीजिये।

दीनदार लड़की होगी तो औलाद दीनदार होगी, मरने के बाद सवाबे-जरिया बनेगी।

और दीनदार औलाद तो बड़ी अहम् चीज़ है,जो मरने के बाद हमारे लिए दुआ-ए-मगफिरत करेंगी।

तो ऐसी औलाद अगर चाहते है तो नेक लड़की का इंतेखाब करे, फिर रंगत उनके चाहे जैसे हो,

और इसी बात को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया और कहा:

“औरत से 4 चीज़ो की वजह से निकाह किया जाता है,

  1.  उसका माल,
  2. हुस्न व जमाल,
  3. उसका ख़ानदान,
  4. उसकी दीनदारी.

लेकिन तुम दीनदारी को थाम लो”

(बुखारी: जिल्द 3, सफ़ा 59)

लिहाज़ा निकाह में रंगत का उसूल छोड़िये और दीनदारी को लाज़िम बनाइये जो दुनिया और आख़िरत की कामियाबी का सबब बने

इन्शा’अल्लाह-उल-अज़ीज़

अल्लाह तआला हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफ़ीक़ दे

हम तमाम को नेक और दीनदार, मुत्तक़ी और परहेज़गार शरीक-ए-हयात नसीब फरमाए

जब तक हमे ज़िंदा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखये

खात्मा हमारा ईमान पर हो

वा आखीरु दवाना अल्हम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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