3 क़िस्म के लोग जिन पर फ़रिश्ते ने लानत की और नबी (ﷺ) ने अमीन कहा

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3 Qism Ke Log Jin Par Farishte Ne Lanat Ki Aur Nabi sallallahu alaihi wasallam Ne Ameen Kaha
sallallahu alaihi wasallam
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3 Qism Ke Log Jin Par Farishte Ne Lanat Ki Aur Nabi sallallahu alaihi wasallam Ne Ameen Kaha

3 क़िस्म के लोग जिन पर फ़रिश्ते ने लानत की और नबी (ﷺ) ने अमीन कहा

मफ़हूम-ए-हदीस: एक रोज़ आप (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब मिम्बर पे चढ़े तो पहले कदम पे आमीन कहा,

फिर दूसरे क़दम पे भी आमीन कहा और तीसरे क़दम पे भी आमीन कहा,

तो सहाबा (रज़ि. अल्लाहु अन्हुमा) ने इसकी वजह पूछी तो फिर आप (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया की:-

1. पहले कदम पे जिब्रील (अलैहि सलाम) ने कहा की: “लानत हो उस शख्स पर जिसने रमज़ान का महीना पा कर भी अल्लाह की बक्शीश न पा सका,” फिर आप (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने आमीन कहा

2. फिर दूसरे कदम पे जिब्रील (अलैहि सलाम) ने कहा की: “लानत हो उस शख्स पर जिसने आप (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) का नाम सुना और आप पर दुरूद ओ सलाम न भेजा” फिर आप (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने आमीन कहा,

3. और तीसरे कदम पे जिब्रील (अलैहि सलाम) ने कहा की “लानत हो उस शख्स पर जिसने अपने माँ-बाप को बूढी उम्र में पा कर भी जन्नत हासिल न कर सका, और फिर आप (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा आमीन,

(इब्ने हब्बन, 3/188)

वजाहत:

इस अहादीस ए मुबारक से ये बात वजह होती है के

रमजान के मुक़द्दस महीने में भी इबादत से महरूम रहने वाले शख्स पर अल्लाह की लानत है,।

नबी-ए-करीम (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़िक्र पर आप पर दुरूदो सलाम न भेज ने वाले पर भी अल्लाह की लानत है, और सबसे छोटा दुरुद है।

“सलल्लाहु अलैहि वसल्लम” लिहाजा हमे चाहिए के जब भी हम अपने नबी का नाम सुने या कहे तो कम से कम साथ में (सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम) तो हम जरूर कहे,

और तीसरे किस्म के वो लोग है जिन पर अल्लाह ने लानत फ़रमाई वो जिसने अपने माँ बाप को बूढी उम्र में पाया लेकिन उनकी खिदमत से महरूम रहकर अपने रब को रज़ि न कर सका।

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