अल्लाह का फ़ज़ल है माल-और-दौलत जानिए

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Allah Ka Fazl Hai Mal-or-Daulat

अल्लाह का फ़ज़ल है माल-और-दौलत

मफ़हूम-ए-हदीस: रसूल’अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास कुछ सहाबा-ए-किराम (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) आते हैं जो गरीब थे, रसूल’अल्लाह से अर्ज़ करते है।

या रसूल’अल्लाह! यह मालदार लोग (सहाबा-ए-किराम) नमाज़ पढ़ते है,

रोज़ा रखते है, हज करते हैं, ज़कात देते हैं, तमाम काम करते है, उसके बावजूद अल्लाह की राह में माल खर्च करके नेकियों में हमसे आगे निकल जाते हैं:-

आप हमे कोई ऐसा अमल (Solution) दे दीजिये ताकि हम भी नेकियों में इनके बराबर आ जाये

रसूल’अल्लाह ने फ़रमाया – “हर नमाज़ के बाद 33 मर्तबा तस्बीह (सुब्हानल्लाह) और तम्हीद (अल्हम्दुलिल्लाह) और तकबीर (अल्लाहु अकबर) और आखिर में कहो ‘लाइलाहा इल्ला वह्दहू ला शारिका लहू, लाहुल मुल्कु व लाहुल हंदु, व

हुवा अला कुल्ली शाइन क़ादिर’

तुम भी नेकियों में इनके बराबर आ जाओगे,”

गरीब सहाबा खुश हुए के अब हम भी नेकियों में अमीर सहाबा के बराबर हो जायेंगे,

मस्जिद में पोहचे, और नमाज़ के बाद तेहतीस-तेहतीस मर्तबा तस्बीह, तम्हीद और तकबीर पढ़ने लगे,

यह अमल देख कर अमीर सहबियों को ताजुब हुआ और एक ने उनसे सवाल किया के ये कैसा अमल है।

अब गरीब सहाबा छुपा भी नहीं सकते थे, उन्होंने कहा के ‘हम तुम्हारी शिकायत लेकर गए थे रसूल’अल्लाह के पास, के तुम माल की वजह से नेकीओं में हमसे आगे निकल जाते हो,

हम भी नेकियों में तुम्हारे बराबर आना चाहते थे

लिहाजा रसूल’अल्लाह ने हमे यह फलाह फलाह तस्बीह दे दी।

उन अमीर सहबियों ने कहा ‘अच्छा ठीक है’

अब अगली नमाज़ में सभी मौजूद है अब नमाज़ के बाद गरीब भी तस्बीह पढ़ रहे है और अमीर भी,

वो फ़ौरन रसूल’अल्लाह के पास पोहचे और अर्ज़ किया, “या रसूल”अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जो अमल आपने हमे दिया था वो उन्होंने ने भी शुरू कर दिया,

रसूल’अल्लाह ने फ़रमाया “ज़ालिका फ़ज़्लुल्लाही युति ही मय्याशाह” (यह अल्लाह का फ़ज़ल है माल-और-दौलत वो जिसे चाहता है अता करता है)

(सहीह बुखारी, भाग 2, 843)

(सहीह मुस्लिम बुक 004, हदीथ न०, 1239,)

वजाहत: इस हदीसे मुबारक से यह बात वजह होती है, के सहाबा नेकियों में इतने हरीश थे के सुन्नत से साबित कोई अमल चोर्तेय नहीं थे,

और जो काम सुन्नत से साबित न था उसे बिद्दत जानते थे

और आज हमारी ला -इल्मी का यह हाल है के हम दौलत के लालच में ऐसे ऐसे बिद्दतो की पैरवी करने लगे है

जिसका शरीयत में कोई वजूद ही न यही और हम उन बिद्दतो पर अमल कर के शरीयत पर यह इलज़ाम लगते है के जो

अमल रसूल’अल्लाह को और सहाबा को मालूम न था वो हमे मालूम हो गया, (नौज़बिल्लाह).

और फिर ऐसी गुस्ताखी करने के बाद भी हम अपने आप को आशिके रसूल, अहले सुन्नत वाल जमात, और जन्नत का मुस्तहिक़ होने का दवा

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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