हमेशा अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करते रहना (वाक़िअ इब्राहिम इस्माइल अलैहि सलाम)

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Hamesha Allah Ki Neymato Ka Shukr Ada Karte Rehna (Waqia Ibrahim & Ismail Alahi Salam)
Ibrahim & Ismail Alahi Salam
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Hamesha Allah Ki Neymato Ka Shukr Ada Karte Rehna (Waqia Ibrahim & Ismail Alahi Salam)

हमेशा अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करते रहना (वाक़िअ इब्राहिम इस्माइल अलैहि सलाम)

हाजरा (अलैहि सलाम) के इंतेक़ाल के बाद जब हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) अपने बेटे इस्माईल (अलैहि सलाम) से मुलाक़ात के लिए आये

तब उन्हें मालूम हुआ के इस्माईल (अलैहि सलाम) का निकाह, मक्का में ही रहने वाली एक खातून (औरत) से हो गया,

हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) जब घर पर जा कर दस्तक दी तो उनकी बहु से मुलाक़ात हुयी,

उनकी बहु ने उन्हें पहचाना नहीं के ये मेरे ससुर (Father In Law) हैं क्योंकि वह उन्हें पहेली बार देख रही थी,

इब्राहिम (अलैहि सलाम) ने अपने बेटे इस्माईल (अलैहि सलाम) के बारे में पोछा तो उनकी बहु ने जवाब दिया की, “वह घर पर नहीं है,

जंगल गए हुवे हैं किसी काम से:-

हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) ने पुछा, “आप लोग खैर खैरियत से तो हो।

और आप लोगो का गुज़र-बसर तो अच्छी तरह से हो रहा है।

इस पर उनकी बहु ने शिक़वा और शिकायत बारे लहज़े में कहा, “हम लोगो के घर में बहुत तंगी है,

और गुज़ारा भी बड़ी मुश्किल से होता है,

अपनी बहु के मुंह से ये बाते सुन कर हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) ने कहा, “अभी तो मैं वापस जा रहा हूँ,

और जब भी इस्माईल (अलैहि सलाम) आये तो उनसे कहना की, “आप के वालिद (Father) आये थे और आप के लिए एक पैगाम (Message) दे गए हैं

की, तुम्हारे घर की चौखट (Door Frame) अच्छी नहीं है, इसे बदल डालो।

जब इस्माईल (अलैहि सलाम) जंगल से वापस आये तो उनकी बीवी (Wife) ने उन्हें उनके वालिद (Father) का पैगाम (Message) सुना दिया,

और फिर खुद ही कहा की, “आप के वालिद ने घर की चौखट (Door Frame) बदलने के लिए क्यों कहा, हमारे घर की चौखट तो अच्छी है,

हज़रात इस्माईल (अलैहि सलाम) जो की अपने वालिद के पैगाम का मतलब समझ गए थे,

अपनी बीवी से कहा की, “मेरे वालिद ने तुम्हे बदलने (तलाक देने) के लिए कहा है, घर की चौखट से मुराद तुम हो।

और इस्माईल (अलैहि सलाम) ने अपनी पहली बीवी को तलाक दे दिया,

और कुछ अर्शे के बाद दुरी खातून (औरत) से निकाह (शादी) कर लिया.

फिर कुछ अर्शे के बाद दुबारा हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम), अपने बेटे इस्माईल (अलैहि सलाम) से मिलने मक्काः शरीफ आये,

इस बार भी जब घर के दरवाज़े पर दस्तक दी तो, उनकी दूसरी बहु से मुलाक़ात हुयी,

इब्राहिम (अलैहि सलाम) ने उन से हज़रात इस्माईल (अलैहि सलाम) के बारे में पुछा, वह दूसरी बहु भी इब्राहिम (अलैहि सलाम) को नहीं पहचानती थी,

क्यों की वह भी उन्हें पहली बार देख रही थी, उस ने जवाब दिया की इस्माईल (अलैहि सलाम) तो कुछ काम से जंगल गए हुवे हैं।

हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) ने अपनी बहु से पुछा, “आप लोग खैर खैरियत से तो हो?

और आप लोगो का गुज़र-बसर अच्छी तरह से तो हो रहा है,

इस पर दूसरी बहु ने जवाब दिया, “

अल्हाम-दू-लिल्लाह, अल्लाह तआला का शुक्र और अहसान है।

हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) ने जब अपनी बहु के मुंह से ये बाते सुनी तो कहा, “अभी तो में वापस जा रहा हूँ,

जब भी इस्माईल घर वापस आये तो उनसे कहना की, “आप के वालिद (Father) आये थे और आप के लिए एक पैगाम दे गए हैं

की “आप के घर की चौखट (दूर फ्रेम) अच्छी है, इसे संभल कर हिफाज़त से रखना।

जब हज़रात इस्माईल (अलैहि सलाम) जंगल से वापस आये तो उनकी दूसरी बीवी ने उन्हें उनके वालिद का पैगाम सुना दिया।

अपने वालिद का पैगाम सुनकर इस्माईल (अलैहि सलाम) ने अपनी दूसरी बीवी से कहा, “मेरे वालिद तुम से खुश थे,

और तुम्हे इज़्ज़त, अहतराम और मोहब्बत से रखने के लिए कहा है।

(सहीह अल-बुखारी भाग: 583-584 क़ुरआन 2:125-129)

अज़ीज़ दोस्तों, हमें हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए,

उसकी नेमतों की न शुक्रि नहीं करना चाहिए,

हज़रात इब्राहिम (अलैहि सलाम) की पहली बहु ने अल्लाह तआला की न-शुक्रि की थी,

इसी लिए आप ने अपने बेटे को उसे तलाक देने के लिए कहा था,

जब की दूसरी बहु ने अल्लाह तआला का शुक्र अदा किया तो आप ने अपने बेटे को उस से प्यार मोहब्बत और अहतराम से पेश आने के लिए कहा,

दोस्तों न शुक्रि करने वाले को अल्लाह तआला पसंद नहीं फरमाता, इसीलिए अपने रब के शुक्र गुज़ार बन्दे बनो,

और उस की नेमतों का हर वक़्त शुक्रिया अदा करते रहो,

जिस से तुम्हारी रोज़ी रोटी, काम-धन्दे, औलाद और माल-और-ज़ार में बरक़त रहेगी, अल्लाह तआला हम सब को अपना शुक्र गुज़ार बन्दा बनाये।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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