क्या हमें आज यानी 6th दिसंबर को (Black Day) मानना सही है या नहीं जानिए पढ़ कर शेयर जरूर करें

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Kya 6th December Ko Black Day Manana Chahiye
Black Day
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Kya 6th December Ko Black Day Manana Chahiye

क्या हमें आज यानी 6th दिसंबर को (Black Day) मानना सही है

बड़ा अफ़सोस हो रहा है के आज हम किस राह पर चल रहे हैं

मेरे प्यारे भाइयों “ब्लैक डे” मानाने का मतलब है उस दिन गम मानना जिस दिन “बाबरी मस्जिद” कुफ़्फ़ारों ने शहीद की थी।

अब आपसे मेरा सवाल है की आप इस्लाम की तारीख (History) में मुझे एक दिन ऐसा बता दे के जिस दिन हम गम मनाते हैं?

बड़ी ही माज़रत के साथ मुझे आपको कहना पड़ेगा की ऐसा कोई दिन नहीं इस्लाम में की जिस दिन हम ने गम मनाया हो क्यों की इस्लाम में गम मनाना मातम करना जाइज़ ही नहीं है।

कुछ तारीखी वाक़ियात आपको याद दिलाने की कोशिश करता हूँ जो इस्लाम में बहुत ही ग़मगीन दिन हैं फिर भी हम इन दिनों में गम नहीं मनाते न ही मातम करते हैं।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जब पर्दा फर्माया:-

इस्लाम के तीन मुक़द्दस खलीफा (हज़रत उमरा, हज़रत उस्मान, हज़रत अली) रज़ि अल्लाहु तआला अन्हुमा को शहीद किया गया।

कर्बला में इमाम-ए-हुसैन रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु और अहले-बैत रज़ि अल्लाहु तआला अन्हुमा को यज़ीदियों ने शहीद किया।

बैत-उल-मुक़द्दस पर जब गैरों ने क़ब्ज़ा किया।

इन सब वाक़ियात पर अगर गौर किया जाये तो हमें पता चला की हम ने कभी इन दिनों पर ब्लैक डे नहीं मनाया बल्कि हम इन दिनों में “इस्लामिक डे” यानी खूब नेकियों भरा दिन के तौर पर मनाते है।

नमाज़ें पढ़ते हैं,

रोज़ा रखते हैं,

सदक़ा देते हैं,

मुसलमानों को खाना खिलते हैं,

आगे आने वाली ज़िन्दगी के लिए अच्छी अच्छी नियतें करते हैं के इन्शा अल्लाह शरीअत की पाबन्दी से अब दिन गुज़रेंगे (Etc)

इसलिए मेरे प्यारे भाइयों हमें चाहिए की बाबरी मस्जिद के लिए “(Black Day”) न मनाकर इससे”इस्लामिक डे” के तौर पर मनाया जाये,

अब हमारे “(Black Day)” मानाने से जो हुआ उसको नहीं बदला जा सकता है मगर इतना ज़रूर है की “बाबरी मस्जिद” की याद में हम 6th दिसम्बर को आपने दिन ज़्यादा से ज़्यादा अपनी मस्जिदों में बीता कर उन्हें आबाद ज़रूर कर सकते हैं,

हमें चाहिए की 6th दिसम्बर को खूब इबादत करे और दुआ करे की “ए अल्लाह तू हम मुसलमानों को आपने खोया हुआ वक़ार वापस अता फार्मा दे”

अगर हम हमेशा शरीअत पर अमल करने वाले बन जायेंगे तो एक दिन ऐसा भी आएगा अल्लाह ने चाहा तो जहाँ हमारी मस्जिद थी वहीँ दोबारा मस्जिद बनायीं जाएगी…

कुछ लोग (Black Day) मानाने को सवाब का काम समझते हैं, जबकि ये गलत है,

किसी दिन को मनहूस (Bura) समझना (Black Day) गलत बात है,

हाँ बाबरी मस्जिद की शहादत का दुख हमें भी है,

लेकिन किसी की शहादत पर 3 दिन तक ही हदीस के अतिबर से गम मना सकते है, इससे ज़ियादा नहीं,

हदीस निचे देख लीजिये,

हज़रते ज़ैनब बिन्ते-जहश रज़ि अल्लाहु तआला अन्हा के भाई का इंतेक़ाल हो गया.

तीन दिन के बाद उन्होंने खुशबू मंगवाई और उसको लगाया,

फिर कहा मुझे खुशबू की ज़रुरत

नहीं थी मगर मैंने “रसूल’अल्लाह ﷺ से सुना के जो औरत और मर्द अल्लाह तआला और क़यामत पर ईमान रखते हो उसके लिए हलाल नहीं के तीन दिन से ज़्यादा किसी मय्यत पर शोग करे,

“सिवाए शौहर के जिसका सोग 4 माह (महीना) 10 दिन है,”

(बुखारी शरीफ “अल जनाइज़ बाब अल’शियाब अल बैद उल कफ़न’ हदीस : (1264″ 1271″ 1272″ 1273” 1287)

इस हदीस से साबित हुआ के सोग सिर्फ तीन दिन का होना चाहिए और वो भी शरीअत के हिसाब से मनाना है?

Say No To “(Black Day) Its Not Allowed In Islam !

अल्लाह पढ़ने से ज़्यादा सोच समझकर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए:-

 

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