मज़ाक़ या ग़ुस्से में गाली देने का अंजाम, जानिए

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Mazaaq Ya Ghusse Me Gaali Deney Ka Anjaam
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Mazaaq Ya Ghusse Me Gaali Deney Ka Anjaam

मज़ाक़ या ग़ुस्से में गाली देने का अंजाम

क़ौल-ए-मुबारक: “तुम जो एक (1) गाली मज़ाक़ और ग़ुस्से में देते हो

उस से तुम्हारी क़बर में एक (1) बिछू बनता है।

हज़रते अली (रज़ि’अल्लाहु अन्हु)

मुसलमान भाई से प्यार से गले मिलना भी सदक़ा है (सुब्हानल्लाह)

मफ़हूम-ए-हदीस: नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते हैं।

“हर नेकी सदक़ा है! तुम अपने मुसलमान भाई से

प्यार से गले मिलो, यह भी नेकी है।

(मुसनदे अहमद जिल्द:5 सफ़ा,111 हदीस,14715)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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