मुस्लिम महिलाओं के पास तीन तलाक से भी बढ़कर है एक अधिकार जानिए क्या

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Teen Talaq se badhkar hai Muslim Mahilaon ke paas adhikar
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Teen Talaq se badhkar hai Muslim Mahilaon ke paas adhikar

पिछले लगभग एक साल से तीन तलाक का मुद्दा मुस्लिम महिलाओं के लिए बेहद गंभीर बनता जा रहा है। कहीं कोई फोन पर अपनी पत्नी को तलाक दे रहा है तो कहीं कोई ख़त लिखकर।

इतना ही नहीं इसके अलावा भी तलाक देने के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। लेकिन आप शायद ये नहीं जानते होंगे की शौहर को तलाक देने के लिए मुस्लिम महिलाओं के पास तीन तलाक से भी बड़ा अधिकार है!

मिशनरी ऑफ अहमदिया मुस्लिम अमृतसर के मिशनरी ताहिर अहमद शमीम बताते हैं कि इस्लाम में जहां पुरुषों को तलाक देने का अधिकार है, वहीं महिलाएं भी खुलअ दे सकती हैं।

महिलाओं को यह भी अधिकार है कि खुलअ देते समय उन्हें इसके कारणों के बारे में भी नहीं पूछा जाता। इसके अलावा तीन तलाक के बजाए मात्र एक बाद खुलअ देने पर महिलाएं पति से अलग हो सकती हैं।

महज़ तीन दफा बोलने से नहीं होता है तलाक

शमीम ने बताया कि अलबकरा 229 के अनुसार महिलाओं का पुरुषों पर उतना ही अधिकार है, जितना पुरुषों का उन पर।

वहीं अलबकरा 230 के अनुसार एक साथ तीन बार तलाक, तलाक, तलाक कहना एक ही बार गिना जाएगा।

तलाक देने वाला पुरुष होश में हो और क्रोध से खाली होकर दो गवाहों की उपस्थिति में तलाक दे तभी वह तलाक माना जाएगा।

तीन तलाक पर क्या कहता है मुस्लिम धर्म

मुस्लिम धर्म के हिसाब से पहली बार तलाक देने पर पुरुष महिला को छोड़ नहीं सकता। उन्हें तीन माह एक साथ रहना होगा।

तीन माह के अंदर अगर सुलह नहीं होती तो उसे पत्नी को उसके मायके छोड़कर आना होगा और तब इसे पूर्ण तलाक माना जाता है।

अगर 90 दिनों में दोनों के बीच सुलह हो जाती है तो बिना किसी की दखलअंदाजी के वे एक साथ रह सकते हैं। ऐसा दूसरी बार तलाक देने के बाद भी होता है।

अगर पति तीसरी बार तलाक शब्द का प्रयोग कर लेता है तो इस स्थिति में महिला अब अपने पति के पास वापिस नहीं आ सकती और तीन माह की प्रक्रिया से भी उसे नहीं गुजरना होगा।

तीन बार तलाक प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद पत्नी अपने पति के पास नहीं जा सकती। ऐसे में महिला किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर सकती है।

लेकिन दूसरे पति के तलाक देने या उसके मर जाने के बाद चाहे तो पहला पति उससे दोबारा निकाह कर सकता है।

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